एमडीएम हॉस्पिटल : फस्टुला को एंडोस्कोपी से बंद करने का पश्चिमी राजस्थान में पहला केस
जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल में बिना चीर-फाड़ ओटीसी क्लीप (ओवर द स्कोप क्लीप) से एक महिला के भोजन नली में बने छेद (फिस्टुला) को बंद कर किया गया। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि यह पश्चिमी राजस्थान का पहला ऐसा केस है, जिसमें मरीज को बिना शल्य चिकित्सा के ओटीसी क्लीप से भोजन नली- श्वांस नली के बीच फिस्टुला को एंडोस्कोपी से बंद किया गया।
मथुरादास माथुर अस्पताल गेस्ट्रो विभाग सुनील दाधीच ने बताया कि दिखाने आई एक महिला के भोजन की नली में छेद होने की संभावना लगी। इंडोस्कोपी करने पर मध्य हिस्से में छेद दिखा। उसके उपरांत सीटी स्कैन करने पर ट्रेकियो-एसोफेजियल-फिस्टुला नाम की बीमारी निकली। इस फिस्टुला ( छेद) को बंद करने के लिए आमतौर पर सर्जरी की जाती है, परंतु डायबिटीज को देखते हुए इसे एंडोस्कोपी से बंद करने का निर्णय किया गया।
खांसी से थी परेशान
डॉक्टरों ने बताया कि 67 वर्षीय महिला चार माह से खाना खाने के साथ खांसी आने से परेशान थी। उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया। एम्स जोधपुर में भी इलाज करवाया, लेकिन बीमारी पकड़ में नहीं आने से आराम नहीं मिल पाया।
अगले दिन ही छुट्टी
मरीज को उसी दिन शाम से खाना शुरू किया गया। अगले दिन छुट्टी दे दी गई। दस दिन बाद वापस ओपीडी में दिखाने पर मरीज को खाने कोई तकलीफ नहीं थी। उसका वजन भी बढ़ऩे लग गया।
चिरंजीवी योजना में इलाज
आमतौर पर ओटीसी क्लिप की बाजार में क़ीमत पचास से साठ हजार रुपए होती है। प्रोसीजर के चार्ज भी ज्यादा होते है। मरीज को यह सारी सुविधा (एंडोस्कोपी, सीटी स्कैन तथा फिस्टुला क्लिपिंग मुख्यमंत्री चिरंजीवी बीमा योजना में मुफ्त में उपलब्ध हुई।
टीम में ये मौजूद
मथुरादास माथुर अस्पताल के एंडोस्कोपी थियेटर में डॉ. सुनील दाधीच, सहयोगी डॉ. अभिषेक, डॉ. विवेक, निश्चेतक डॉ. हर्षिता, नर्सिंग कर्मचारी दीपाराम, सोनू तथा गोविंद।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3HIedwp
0 comments:
Post a Comment