कांस्टेबल ने थानाधिकारी व डीएसटी प्रभारी के लिए मांगे 1.10 लाख रुपए

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जोधपुर।
फलोदी थाने के कांस्टेबल ने मादक पदार्थ से भरी गाड़ी निकालने व खाली करवाने के लिए थानाधिकारी और डीएसटी प्रभारी के लिए 1.10 लाख रुपए रिश्वत मांगी। कांस्टेबल से व्हॉट्सऐप कॉल पर डीएसटी प्रभारी एसआइ लाखाराम (SI Lakharam) ने स्वीकृति भी दी, लेकिन एसीबी कार्रवाई की भनक लगने पर रिश्वत नहीं ली, लेकिन एसीबी ने रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया है। (1.10 Lakh bribe deemand)
सूत्रों के अनुसार हंसादेश गांव निवासी रमेशचन्द्र पुत्र भागीरथ बिश्नोई ने एक मई को एसीबी की विशेष यूनिट के समक्ष लिखित शिकायत दी थी।जिसमें कांस्टेबल महेन्द्र के मार्फत फलोदी थानाधिकारी राकेश ख्यालिया व डीएसटी प्रभारी एसआइ लाखाराम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया। एसीबी ने 4 मई को परिवादी को फलोदी थाने भेजा, जहां परिवादी और कांस्टेबल के बीच वार्ता हुई। जिसमें कांस्टेबल की ओर से थानाधिकारी व डीएसटी प्रभारी के लिए 50-50 हजार रुपए और खुद के लिए दस हजार रुपए कुल 1.10 लाख रुपए मांगने की पुष्टि हुई थी।
एसीबी ने 6 मई को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। परिवादी को 6 मई को 1.10 लाख रुपए देने के लिए फलोदी थाने भेजा, लेकिन कांस्टेबल नहीं मिला। ट्रैप कार्रवाई न होने पर एसीबी जोधपुर लौट आई थी।
इस बीच, परिवादी नौ मई को एसीबी के समक्ष पेश हुआ और आरोपी पुलिसकर्मियों को एसीबी कार्रवाई की भनक लगने व रिश्वत न लेने की सूचना दी थी।
गोपनीय सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर एसीबी ने जांच रिपोर्ट बनाकर एसीबी के जयपुर मुख्यालय भेजी, जहां चिरढाणी निवासी कांस्टेबल महेन्द्र पुत्र हुक्माराम जाट व अन्य के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया गया। कांस्टेबल को फलोदी से लाइन हाजिर किया गया है। एसीबी का कहना है कि सत्यापन में थानाधिकारी की भूमिका सामने नहीं आई है।
टोल के कैमरों में परिवादी को एसीबी संग देखा
परिवदी का आरोप है कि पुलिस को एसीबी कार्रवाई का अंदेशा हो गया था। थानाधिकारी ने टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज देखे तो परिवादी को एसीबी के साथ देख लिया था। इसीलिए पुलिस ने रिश्वत नहीं ली थी।
आरोप : थाने में मारपीट व रुपए मांगने का दबाव डाला
परिवादी का आरोप है कि कुछ दिन पहले डीएसटी प्रभारी लाखाराम ने उसे पकड़ा था और लोहावट गांव की ओरण में ले जाकर मारपीट की थी। फिर उसे लोहावट थाने ले जाया गया था, जहां से उसे फलोदी थाने भेज दिया गया था। थानाधिकारी ने कांस्टेबल महेन्द्र से मिलने भेजा था। उसने डोडा पोस्त तस्करी करने का आरोप लगाकर थानाधिकारी व डीएसटी प्रभारी के लिए एक लाख रुपए मांगे थे।



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