Nirjala Ekadashi Vrat: आखिर क्यों मनाई जाती है निर्जला एकादशी, किसकी मिलती है कृपा, जानिए शुभ मुहूर्त

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जोधपुर। सनानत धर्म में निर्जला एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार निर्जला एकादशी बुधवार को सर्वाार्थ सिद्धि और रवि योग में मनाई जाएगी। वहीं, गंगा दशहरा (गंगा दशमी) मंगलवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की एकादशी तिथि मंगलवार को दोपहर 1:32 बजे शुरू होगी और समापन बुधवार को दोपहर 1:36 बजे पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत बुधवार को रखा जाएगा।

भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं: पौराणिक शास्त्रों में इसे भीमसेन एकादशी, पांडव एकादशी और भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। सभी 24 एकादशी व्रतों में निर्जला एकादशी व्रत को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पं. अनीष व्यास के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति निर्जला एकादशी व्रत रखता है, उसे सभी 24 एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने और निर्जला उपवास रखने से विशेष लाभ मिलता है। महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम ने भी इस एकादशी पर व्रत किया था। इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। नाम से ही आभास हो रहा है कि निर्जला एकादशी व्रत निर्जल रखा जाता है। इस व्रत में जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। व्रत के पूर्ण हो जाने के बाद ही जल ग्रहण करने का विधान है।

निर्जला एकादशी मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारम्भ: 30 मई को दोपहर 1:32 बजे।

एकादशी तिथि समाप्त: 31 मई को दोपहर 1:36 बजे।

निर्जला एकादशी का पारण: 01 जून को सुबह 05:24 से सुबह 08:10 बजे तक।



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