जोधपुर।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार नागौर जिले में वोल्फ्रेमाइट चट्टानों में लिथियम के महाभंडार का दावा किया गया। इतना ही नहीं, न केवल चट्टानों में बल्कि नागौर जिले के भूजल में भी लिथियम की प्रचुर मात्रा पाई गई है। नागौर जिले के भूजल में लिथियम की मात्रा पर जोधपुर के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ डीडी ओझा ने करीब 10 साल पहले ही शोध कर लिया था। डॉ ओझा पहले वैज्ञानिक है, जिन्होंने नागौर नागौर जिले के सभी ब्लॉक्स में भूजल में लिथियम की मात्रा पर अपने शोध पत्रों के माध्यम से जनमानस तक इसकी उपयोगिता उजागर की।
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कुचामन, नागौर में सर्वाधिक व परबतसर में न्यूनतम
जिले के सभी ब्लॉक्स में भूजल पर किए गए शोध के अनुसार कुचामन, नागौर, मूण्डवा व डेगाना आदि में भूजल में लिथियम की मात्रा अधिक सर्वाधिक व परबतसर, लाडनू के भूजल में न्यूनतम पाई गई।
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बैटरियों सहित कई क्षेत्रों में उपयोगिता
लिथियम की उपयोग कई क्षेत्रों में हैं। जिसमें बैटरियों के सेल, ट्रेसर बुलेट, टेलीस्कोप, स्पेसक्रापॅ्ट, औषधियों, वायु शोधन, टेक्सटाइल इंडस्ट्री, मिनरल वाटर, क्रॉकरी आदि क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जाता है।
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खनिजों का भण्डार
नागौर जिला खनिज से परिपूर्ण है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस क्षेत्र में छिपे लिथियम सहित अन्य खनिजों के भी भण्डार है, जिन पर विस्तृत शोध की आवश्यकता है। जिससे इस क्षेत्र के खजिनों का दोहन आर्थिक, औद्योगिक, वैज्ञानिक प्रगति में हो सके। इससे ने केवल विदेशों पर निर्भरता भी कम होगी बल्कि रोजगार की भी प्रबल संभावनाएं पैदा होंगी।
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विभिन्न ब्लॉक्स के भूजल में लिथियम का औसत मान
ब्लॉक्स----- लिथियम (मिलिग्राम/ प्रति लीटर)-- विद्युत चालकता (माइक्रो साइमन/प्रति सेमी)
कुचामन--- 3.82--------------------------------------- 21000
नागौर--- 2.80---------------------------------------- 19000
मूण्डवा----- 1.72---------------------------------------18500
डेगाना--- 3.42---------------------------------------- 18000
जायल--- 0.49---------------------------------------- 17200
मकराना---- 1.72--------------------------------------- 13000
डीडवाना--- 0.98----------------------------------------12400
मेड़ता----- 1.14----------------------------------------12000
परबतसर--- 0.16---------------------------------------7000
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नवीन शोध का विषय
देश-विदेश में जल में लिथियम पर विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है। यह वैज्ञानिकों के लिए नए शोध का विषय है। कालान्तर में इस अध्ययन के फलस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में आशान्वित लाभ होने की संभावना है।
डॉ डी डी ओझा, पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक
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