STEROIDS---मसल्स और मैडल्स की चाह, युवा पकड़ रहे स्टेरॉड्स की अंधेरी राह

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर।

खेलों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा व मैडल की चाह में कई युवा खिलाड़ी नशे की राह पर है। वहीं, शहर में ऐसी कई फिटनेस सेंटर व खेल अकादमियां भी है, जहां जल्दी मसल्स व स्टेमिना बढ़ाने के लिए खिलाड़ी से उसकी क्षमता से ज्यादा वर्जिश कराई जाती है। खिलाड़ी के थकने या दर्द होने पर पेनकिलर के रूप में उसे स्टेरॉयड, अफीम या लिक्विड नशीले पदार्थ के उपयोग की सलाह दी जाती है। इससे उसको दर्द में तो आराम मिलता है, लेकिन वह रूटीन में स्टेरॉयड आदि नशीले पदार्थों के सेवन का आदि हो जाता है। हाल ही में ऐसे मामलों को लेकर चिकित्सकों व खेल एक्सपर्ट्स ने अंदेशा जताया कि स्टेरॉयड्स व अन्य नशीली दवाएं न केवल खिलाड़ी के स्वास्थ्य पर बुरा असर करती है बल्कि उनका खेल कॅरियर बर्बाद कर सकती है।
---

ट्रेनर के लिए यह योग्यता जरूरी
किसी ट्रेनर के लिए यह जरूरी होता है कि वह संबंधित खेल में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री, पीजी कोर्स या एमएस डिग्री लिया हुआ हो। यह सभी कोर्स शारीरिक शिक्षा कोचिंग में होने अनिवार्य है, तभी वह किसी को ट्रेन कर सकता है।

----
केस-1 नशे से बर्बाद हुआ खेल कॅरियर

सालवा निवासी विक्रमसिंह (बदला हुआ नाम) को एक खेल एकेडमी में प्रेक्टिस करने के दौरान बहुत ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड दिया गया। जिसकी वजह से उसकी हेमस्ट्रिंग मसल्स परमानेंट इंजर्ड हो गई है। परिणामस्वरूप वह अब आगे नहीं खेल पाएगा।
----

केस-2 सेना भर्ती का सपना टूटा
डिगाडी निवासी कपिल (बदला हुआ नाम) एक निजी एकेडमी में सेना भर्ती की तैयारी के लिए गया। जहां गलत तरीके से अभ्यास कराने से वह दर्द के निवारण व मसल बढ़ाने के लिए दर्द निवारक टेबलेट के ज्यादा सेवन से आंतरिक रूप से कमजोर हो गया। इसे तैयारी छोड़नी पड़ी और मेडिकली अनफिट हो गया

---------------------------
खिलाड़ियों को नशे से दूर रहकर अकादमी में अपने लक्ष्य पर ध्यान देते हुए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। मैने कॉमनवेल्थ तक खेला है, लेकिन कभी नशीले पदार्थ या सप्लीमेंट्स नहीं लिए, जिससे खेल व स्वास्थ्य प्रभावित हुआ हो। आज भी नियमित प्रेक्टिस, वर्जिश व स्वास्थ्यवर्धक फूड सप्लीमेंट्स लेता हूं।
घमंडाराम, अंतरराष्ट्रीय एथलीट

-----
युवा खिलाड़ियों में फिजिकली फिट दिखने की होड़ में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जिस पर प्रभावी अंकुश होना चाहिए। फिटनेंस सेंटर्स पर प्रशिक्षित ट्रेनर होने जरूरी है। तभी वह सही मायने में खिलाड़ी को सही प्रशिक्षण दे सकेंगे।

हापूराम चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष
राजस्थान शारीरिक शिक्षक संघ

----



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/Hk8OMCS
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment