'आज के बेरोजगार युवाओं का मार्मिक दस्तावेज उपन्यास परीक्षा सेतु"
डिम्पल के उपन्यास के लोकार्पण समारोह बोले डॉ. सत्यनारायण
जोधपुर. उपन्यास में कोई एक नायक या नायिका नहीं है, बल्कि हर बेरोजगार युवा नायक व नायिका है, जो परीक्षा सेतु को पार करने की जद्दोजहद में एक उम्र गवां देता है। युवा सपनों की टूट फूट का यह उपन्यास आज के बेरोजगार युवाओं का मार्मिक दस्तावेज है।
कथाकार डॉ. सत्यनारायण ने युवा लेखिका डिम्पल के प्रथम उपन्यास 'परीक्षा सेतु' के विमोचन के अवसर पर यह बात कही। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. सत्यनारायण ने डिम्पल के उपन्यास पर समग्र बात करते हुए कहा कि अब यह उपन्यास पाठकों को समर्पित हो गया है। अब डिम्पल को अगले उपन्यास की ओर बढ़ना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शायर हबीब कैफ़ी ने कहा कि डिम्पल को अपने साहित्यिक पुरखों को पढ़ते हुए उनके पदचिह्नों पर चलना होगा। कैफ़ी ने कहा कि साहित्यकार वक़्त की हवा को पहचानकर प्रतिरोध का साहित्य रचता है। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के लेखकों ने शोषित, पीड़ित, वंचित और दलित की आवाज़ बनकर लिखा।
ज्ञान परम्परा में शब्द संसार
विशिष्ट अतिथि के तौर पर बोलते हुए वरिष्ठ रंगकर्मी कमलेश तिवारी ने कहा कि इस समय कई युवा लेखक अपने समय को दर्ज करते हुए लिख रहे हैं, अब उनमें डिम्पल भी शामिल हो गई है। युवा लेखक माधव राठौड़ ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में शब्द संसार को आगे बढ़ाने में डिम्पल का नाम जुड़ गया है। डिम्पल का उपन्यास अपने समय के ज्वलंत मुद्दों को उजागर करते हुए यथार्थ को परिभाषित करता है। कार्यक्रम में स्वागत भाषण ब्रह्मसिंह चौहान और धन्यवाद डॉ. विनोद गहलोत ने किया और कार्यक्रम का संचालन पूजा राजपुरोहित ने किया। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ साहित्यकार, रंगकर्मी, मीडियाकर्मी उपस्थित थे।
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