जोधपुर. आपाणी संस्कृति मांय होळी मंगळिजनै री बैला सूं लेय'र रंग रमाई तक रौ आपरौ न्यारौ मैतव है, आज रै दिन बुराई रै ऊपर अच्छाई री जीत व्ही ही जिणनै आज होळी रौ प्रतीक मानीजै है। अर जद लोग आपसी मतभेद नै भुला'र एक हो जावै, आपानै सामाजिक सद्'भावना रौ मेळ हुवतौ दिसै। जठै एक तरफ होळी नै मंगळावण रौ आध्यात्मिक रूप है उणी दूजी तरफ इणरौ वैज्ञानिक रूप भी है क्यूंकि इण दिन आग री तपीश रै कारण पर्यावरण मै मौजूद तमाम तरै रा जीव जीनावरां रौ खात्मौं व्है जावै।
अर चंगां री थाप सूं आखती पाखती री सगळी नकारात्मकता दूर व्है जावै।होळी मैं रंगा री भी आपरी नवीं पिछाण देखणजोग है जै इण दिन कौई लाल रंग रौ गुलाल लगावै तो हर तरै रा मनभेद और रिश्तां री दूरी मिट जावै, क्यूंकि लाल रंग प्रीत और मैत्री रौ प्रतीक मान्यौ जावै, ज्यूं ही पीळौ रंग हळदी रौ गिणीजै जिणसूं मंगळ काज री सरुआत होवै कर केसरियौ कसूंबल तो जग चावौ है,अर जठै हरौ रंग हरियाळी अर भर्'यौ पूर्'यौ जीवण रौ प्रतिक मानीजै उठै ही नीळौ रंग श्री कृष्ण सूं जुड़ीयोड़ौ है,जिणमै संपूर्ण जगत री संपूर्णता है।अर सैंसू महताऊ रंग गिणिजै अपणायत रौ रंग जिकौ आपाणी संस्कृति री औळखाण है।होळी री भावना नूवै वसंत रै खिलने रौ प्रतिबिंब है। ज्यूं एक नूवौं मौसम शुरू व्है, उण तरां रिश्तौं मैं भी नूवीं मिठास घुळै।
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