RAM NAVAMI-- 7 झांकियों से शुरू हुई थी RAM NAVAMI रामनवमी शोभायात्रा, अब शामिल होती है 400 से अधिक

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जोधपुर।

जोधपुर. विश्व हिन्दू परिषद की ओर से शहर में रामनवमी पर निकाली जाने वाली शोभायात्रा सबसे पहले वर्ष 1984 में 7 लोगों ने मिलकर 7 झांकियों के साथ निकाली थी। इसके बाद कारवां बढ़ता गया और अब गत वर्ष शोभायात्रा में 400 से अधिक झाकियां, 25 से अधिक अखाड़े, भजन मंडलियों व युवाओं की भगवा रैली सहित बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया था। इस बार भी रामनवमी शोभायात्रा को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई है। इस कड़ी में सोमवार को विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय भारत माता मंदिर में रामनवमी महोत्सव समिति की बैठक में अध्यक्ष, महामंत्री आदि पदाधिकारियों की घोषणा हुई।

इस बार होगी 39वीं शोभायात्रा

विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय भारत माता मंदिर में हुई बैठक में इस वर्ष की रामनवमी महोत्सव समिति की घोषणा हुई। विहिप प्रांत अध्यक्ष डॉ. राम गोयल ने समाजसेवी डॉ. के आर डऊकिया को अध्यक्ष, महेन्द्र उपाध्याय व संपतसिंह मंडोर को महामंत्री मनोनीत किया गया। प्रांत सहमंत्री महेन्द्रसिंह राजपुरोहित ने बताया कि इस बार की शोभायात्रा शहर की 39वीं रामनवमी शोभायात्रा होगी। बैठक में विहिप पूर्व प्रांत संगठन मंत्री ईश्वरलाल, विभाग मंत्री पं. राजेश दवे, कार्याध्यक्ष रामस्वरूप भूतड़ा, रामप्रताप अग्रवाल आदि मौजूद थे।

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राम चौक से गीता भवन तक शोभायात्रा

1984 शहर में पहली बार निकली रामनवमी शोभायात्रा की पूरी तैयारियां व पूजन राम चौक आदर्श विद्या मंदिर स्कूल से शुरू होकर शोभायात्रा के रूप में घण्टाघर व वहा से सिरे बाजार होती हुई गीता भवन तक जाती थी । घण्टाघर पर प्रथम पूजा शुरू से ही पूर्व सांसद गजसिंह करते थे, उसके बाद यात्रा विधिवत शुरू होती। यह सिलसिला आज तक जारी है ।

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एक नजर में शोभायात्रा

- राम जन्मभूमि आंदोलन को शुरू करने के मौके पर पहली बार विहिप ने निकाली शोभायात्रा।

- 7 लोगों ने शुरू की थी रामनवमी महोत्सव शोभायात्रा।

- 7 झांकियां पहली बार शामिल हुई।

- 400 से अधिक झांकियां थी गत वर्ष की शोभायात्रा में।

- 12 घंटे गत वर्ष सुबह 9 से रात 9 बजे तक चली शोभायात्रा।

- 70 से अधिक झांकियां ग्रामीण क्षेत्रों से।

- 25 से अधिक होते हैं अखाड़े।

- 25 वर्षों से छप रहे हैं रामनवमी कैलेंडर, प्रधानमंत्री कार्यालय, संघ मुख्यालय में भी जाते हैं।

- 1987 से वरिष्ठ दलपति सुरेंद्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में पहला अखाड़ा शुरू।

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