कृष्ण मृगों के लिए स्वच्छंद विचरण का विकल्प बनेगा जसवंतगढ़
राज्य सरकार ने राजस्व भूमि को वन भूमि के तौर पर आरक्षित किया
जोधपुर. तालछापर अभयारण्य में कृष्ण मृगों की बढ़ती आबादी को देखते हुए नागौर जिले का जसवंतगढ़ वैकल्पिक आश्रय स्थल बन सकेगा। राज्य सरकार ने इसके लिए राजस्व भूमि को वन भूमि के तौर पर आरक्षित करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार की ओर से हाईकोर्ट में यह जानकारी दी गई।
न्यायाधीश संदीप मेहता तथा न्यायाधीश राजेंद्र प्रकाश सोनी की खंडपीठ में स्व प्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पूर्व में दिए गए निर्देशों की पालना में अतिरिक्त महाधिवक्ता सुनील बेनीवाल ने कहा कि नागौर जिले के जसवंतगढ़ गांव के खसरा संख्या 329 एवं 361 की 2223 बीघा एवं 11 बिस्वा भूमि को कृष्ण मृगों के आश्रय स्थल विस्तार के लिए वन भूमि के तौर पर आरक्षित किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने 30 जनवरी को आदेश जारी कर दिया है। कोर्ट ने इस तथ्य पर चिंता जताई कि पूर्ववर्ती आदेश के बावजूद निगरानी समिति का गठन नहीं किया गया है। समिति के गठन की आकस्मिक आवश्यकता पर विचार करते हुए कोर्ट ने उप वन संरक्षक चूरू के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी और निर्देश दिए कि निगरानी समिति में पूर्व न्यायाधीश दलीप सिंह अध्यक्ष होंगे, जबकि आरएन मेहरोत्रा, सूरत सिंह पूनिया, डॉ. महावीर प्रसाद,डॉ. केसी सोनी और आनंद सिंह गहलोत सदस्य होंगे। वन एवं वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को अगले पंद्रह दिनों में समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों के परामर्श से निबंधन एवं शर्ते तय करने को कहा गया है। खंडपीठ ने समिति से अपनी कार्यवाही शुरू करते हुए अगले दो महीनों के भीतर प्रारंभिक प्रगति रिपोर्ट को अवलोकन के लिए अग्रेषित करने का अनुरोध किया है। अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी।
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