जोधपुर।
पश्चिमी राजस्थान में डेयरी उत्पादों व एग्रो प्रोडक्ट्स में बढ़ते स्कोप को देखते हुए यहां डेयरी टेक्नोलॉजी व एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। राज्य सरकार की ओर से दोनों महाविद्यालयों की स्थापना को मूर्तरूप देने के लिए 31 करोड़ रुपयों की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में कृषि विश्वविद्यालय के अधीन दोनों महाविद्यालयों का संचालन कृषि विश्वविद्यालय परिसर में ही किया जा रहा है। वित्तीय स्वीकृति जारी होने से दोनों महाविद्यालयों के अलग-अलग भवन बनेंगे।
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होस्टल, डीन निवास आदि बनेंगे
इस स्वीकृति के अंतर्गत डेयरी टेक्नोलॉजी व एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए अलग-अलग
अकादमिक भवन, छात्र-छात्रा छात्रावास, अधिष्ठाता निवास, परिसर का मुख्य द्वार, सड़क निर्माण, यांत्रिक उपकरणों के रखरखाव के लिए परिसर के साथ अन्य कार्य कराए जाएंगे।
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प्रदेश में उदयपुर के बाद जोधपुर में ही यह कॉलेज
राजस्थान में जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय दूसरा विश्वविद्यालय है, जहां यह दोनों कॉलेज होंगे। इससे पहले उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग व डेयरी टेक्नोलॉजी संकायों में पढ़ाई कराई जा रही है। जोधपुर में इन कॉलेजों के खुलने से मारवाड़ व प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को अध्ययन करने का मौका मिलेगा।
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पश्चिमी राजस्थान के विद्यार्थी होंगे लाभान्वित
- एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में परम्परागत कृषि में तकनीकी अपनाकर उन्नत कृषि का अध्ययन कराया जाएगा। जिसमें फार्म इक्विपमेंट, मशीनरी कंस्ट्रक्शन, डिजाइन और फार्मिंग इम्प्रूवमेंट से संबंधित पाठ्यक्रम शामिल होंगे।
- डेयरी टेक्नोलॉजी में छात्रों को मिल्क प्रोडक्शन, डेयरी इक्विपमेंट एंड यूटिलिटीज, मिल्क प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग, डेयरी प्रोडक्ट्स, इंश्योरेंस, डेयरी मैनेजमेंट तथा मार्केटिंग से जुड़े पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराई जाएगी।
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राज्य सरकार के सहयोग तथा सभी के प्रयासों से विश्वविद्यालय के अधीन डेयरी टेक्नोलॉजी व एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज बनने प्रदेश के हजारों विद्यार्थी लाभान्वित होंगे तथा यह विश्वविद्यालय उत्तरोतर प्रगति करेगा।
प्रो बी.आर. चौधरी, कुलपति
कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर
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