सहानुभूति की सियासत

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संदीप पुरोहित

जोधपुर जिले की शेरगढ़ तहसील के भुंगरा गांव की गैस सिलेंडर दुखांतिका ने हर किसी को झकझोर दिया है। भुंगरा में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है। चुनावी नजदीक होने से न सिर्फ जोधपुर जिले बल्कि संभाग की सियासत भुंगरा के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। सभी नेताओं ने सहानुभूति जताई, लेकिन इसके साथ ही सियासत भी चलती रही। किसी ने राज्य सरकार को घेरा तो किसी ने इशारों ही इशारों में केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने दूसरे ही दिन सुबह अस्पताल पहुंचकर मरीज व परिजन से मिल ढांढस बंधाया था। इसके बाद जैसे-जैसे मौतों की संख्या बढऩे लगी और चिताएं सुलगने लगीं। उसी के साथ राजनीतिक गर्माहट भी तेज होने लग गई। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया दो बार भुंगरा व अस्पताल में मरीज व परिजन के हाल-चाल जानने आ चुके हैं।

केंद्रीय मंत्री व सांसद गजेंद्रसिंह शेखावत भी अस्पताल में मरीज व परिजन से मिलने के बाद भुंगरा जा चुके हैं। जोधपुर जिले के अलावा जालोर-सिरोही सांसद देवजी भाई पटेल व विधायक हमीर भायल और अधिकांश जनप्रतिनिधि भुंगरा का दौरा कर चुके हैं। यहां तक कि पूर्व मंत्री व विधायक भाटी भी दो बार अस्पताल व भुंगरा आए थे। अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी भुंगरा का दौरा किया है। पहले सप्ताह तक किसी भी व्यक्ति या राजनेता ने राहत पैकेज अथवा आर्थिक सहायता की मांग नहीं की, लेकिन मौतों की संख्या में इजाफा होने लगा तो धीरे-धीरे राजनेताओं की सक्रियता बढऩे लगी।

पूर्व विधायक बाबूसिंह राठौड़ व तेना व अन्य नेता महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी के बाहर 15 दिसम्बर से धरने पर बैठ गए। पहले 25-25 लाख और फिर 50-50 लाख रुपए व नौकरी की मांग पर अड़ गए। सांसद हनुमान बेनीवाल व देवजी भाई पटेल ने लोकसभा के शीतकालीन सत्र में यह मामला उठाते हुए राहत पैकेज की मांग की थी। तब पीएम राहत कोष से मृतकों के आश्रित को 2-2 लाख रुपए व घायलों को 50-50 हजार रुपए के मुआवजे की घोषणा की गई थी। रविवार को आक्रोश रैली निकाली गई, जिसे सर्व समाज की रैली का नाम दिया गया। रैली से एक दिन पूर्व ही सरकार ने 17-17 लाख रुपए राहत पैकेज का प्रस्ताव रखा था, लेकिन समाज के लोग राजी नहीं हुए थे। वे रैली निकालने पर अड़ गए थे। रैली निकालने के बाद भी उसी पैकेज पर सहमति बनीं थी। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सीएम राहत कोष से तीन-तीन लाख रुपए सहायता राशि बढ़ाकर राहत दिलाई है। चुनावी साल है, रणभेरी हो चुकी है। सभी नेताओं ने अपनी-अपनी रोटियां सेंकी हैं।



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