वेट एण्ड वाॅच

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संदीप पुरोहित

जोधपुर के भुंगरा गांव की गैस दुखान्तिका पर सियासत शांत भी नहीं हुई कि मारवाड़ से एक और चिंगारी उठी, जो शोला बन पूरे प्रदेश में सुलग रही है। तापमान में गिरावट के बीच मारवाड़ में कांग्रेसी नेताओं के बयानों ने सियासी पारा चढ़ा दिया।

पंजाब प्रभारी व बायतु विधायक हरीश चौधरी ने गत दिनों चौहटन क्षेत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर आरोपों की झड़ी लगा दी। चौधरी ने इशारों-इशारों में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के बारे में कहा कि तीसरी पार्टी गहलोत की वजह से खड़ी है। उन्होंने मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि जब हम लोगों के बीच में विवाद नहीं होता तब वे परेशान होते हैं। जब विवाद और आपस में अनबन होती है तो नींद आती है। जब तक हम विरोध विवाद में चलते रहेंगे ये परेशान नहीं होंगे।

उल्लेखनीय है कि बायतु में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने हरीश चौधरी की नींव हिला रखी है। पिछले चुनाव में हरीश चौधरी हारते-हारते जीते थे। सियासत के पुराने खिलाड़ी मुख्यमंत्री गहलोत पूरे मामले से वाकिफ होने के बावजूद खामोश हैं, लेकिन उनके करीबी व पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ के चौधरी पर पलटवार से मारवाड़ की जाट राजनीति में हड़कम्प मच गया।

जाखड़ ने न सिर्फ चौधरी को आड़े हाथों लिया, बल्कि पुराने विरोधी मदेरणा परिवार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने लीला मदेरणा और दिव्या मदेरणा के साथ दिवंगत परसराम मदेरणा पर भी निशाना साधा। मदेरणा परिवार ने समझदारी दिखाते हुए जवाब नहीं दिया।

जाखड़ ने कहा कि हरीश चौधरी को मंत्री बनाया, प्रभारी बनाया। आज वे जो कुछ हैं, गहलोत के कारण हैं। जाखड़ के आरोपों के बाद चौधरी खामोश हैं। पर सन्नाटे के बीच अंदर बहुत कुछ पक रहा है। जाट वोट को लेकर जाखड़ के दावे और सियासत को लेकर तो समय ही बताएगा, लेकिन मारवाड़ में 42 सीटों पर जाट समाज की प्रमुख भूमिका है। ऐसे में घमासान को कांग्रेस और भाजपा दोनों गम्भीरता से देख रही है। पर फिलहाल सबकी रणनीति वैट और वॉच की नजर आ रही है।



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