जोधपुर.
मैं जोधपुर से हूं और अब कोलोन, जर्मनी से बाहर हूं और जर्मन मल्टीनेशन कंपनी के साथ ग्लोबल प्रोसेस ओनर के रूप में काम कर रहा हूं। मैंने अपनी स्कूली शिक्षा बीएसएफ स्कूल से पूरी की है,वहीं जीवाजी विश्वविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक और कूपा विश्वविद्यालय सैन डिएगो, यूएसए से सीओयूपीए में सर्टिफिकेट प्राप्त किया है। जहां तक मेरी सफलता की यात्रा की बात है, मैंने बहुत छोटे स्तर से शुरू कर बड़ी मेहनत से सात समंदर पार सफलता का रास्ता तय किया है। मैं राजस्थान एसोसिएशन जर्मनी और राजस्थान इंटरनेशनल संस्थाओं के डॉक्टर्स के माध्यम से भी हर एनआरआइ की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता हूं।
सेवा की इसी भावना के साथ 'जर्मनी/यूरोप में रहने वाले सभी राजस्थानियों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से राजस्थान एसोसिएशन जर्मनी का गठन किया गया है और हम जर्मनी से अधिक से अधिक प्रवासी भारतीयों/राजस्थानियों को जोड़ने के उद्देश्य से निरंतर प्रयास कर रहे हैं। जो लोग भारत से जर्मनी पहुंच रहे हैं, उनके पंजीकरण, आवास खोजने, चिकित्सा आपात स्थिति, रोजगार के लिए सामुदायिक और सामाजिक संपर्क के लिए मंच देते हैं और मार्गदर्शन देते व सहायता करते हैं। हम नियमित रूप से त्योहार योग, स्वतंत्रता दिवस का आयोजन करते हैं और हमारे राज्य और देश की परंपराओं/संस्कृति को बनाए रखते हैं और निवेश के अवसरों, सर्वोत्तम अभ्यास साझा करने के लिए भागीदारी मंच विकसित करते हैं। इसके लिए हम राजस्थान फाउंडेशन और फ्रैंकफर्ट जर्मनी में भारत के महावाणिज्य दूत के साथ मिलकर काम करते हैं।
डॉक्टर ऑफ राजस्थान इंटरनेशनल (डीओआरआई) संगठन अनिवासी राजस्थानियों का प्रतिनिधित्व करता है। यह राजस्थान फाउंडेशन के सहयोग से कार्य करता है। दरअसल यह अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों का एक समूह है, जिसकी जड़ें राजस्थान से जुड़ी हुई हैं। हमने एसएमएस जयपुर, एम्स जोधपुर व आरएनटी उदयपुर आदि के साथ कई सर्वोत्तम अभ्यास सत्र आयोजित किए हैं। हमसे कोई भी एनआरआइ मदद ले सकता है।
(जैसा राजस्थान एसोसिएशन जर्मनी के संस्थापक और राजस्थान इंटरनेशनल डॉक्टर्स संस्था के
महासचिव व सह संस्थापक हरगोविंदसिंह राणा ने पत्रिका के एम आई जाहिर को बताया।)
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