याचिकाकर्ता सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिला तथा राज्य स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित करने की मांग उठाई थी, ताकि पुलिस की कार्यप्रणाली को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सके। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में वर्ष 2006 में दिए गए निर्णय का जिक्र किया है, जिसमें केंद्र व राज्य सरकारों को पुलिस शिकायत प्राधिकरण गठित करने संबंधी दिशा-निर्देश दिए गए थे।
मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल तथा न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने 14 अक्टूबर, 2022 के पत्र की एक प्रति प्रस्तुत की, जिसमें न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाले राज्य स्तरीय पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया गया है।
जस्टिस शब्द को लेकर भी आपत्ति
कोर्ट ने पाया कि प्राधिकरण का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में प्राधिकरण के गठन का निर्देश दिया था, जबकि सरकार ने सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी को प्राधिकरण का अध्यक्ष बना दिया। प्राधिकरण गठन के आदेश में जिला जज से स्तर से सेवानिवृत्त अधिकारी के नाम के आगे जस्टिस शब्द लगाए जाने पर भी कोर्ट ने आपत्ति जताई। जिला स्तरीय समितियों का गठन भी नहीं किया गया है। खंडपीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को राज्य सरकार से निर्देश लेते हुए अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।
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