जोधपुर में खुले एनसीसी अकेडमी तो खुल सकती है हजारों युवाओं की तकदीर

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जोधपुर. सेना में कॅरियर बनाने का संपना संजोने वाले एनसीसी कैडेट्स (NCC) बरसों से एक बड़ी परेशानी का सामना कर रहे हैं। अकेले जोधपुर ग्रुप में 18 हजार एनसीसी कैडेट्स है, लेकिन उन्हें ट्रेंड करने के लिए न तो कोई जगह और न ही संसाधन। ट्रेनिंग के लिए आने वाले कैडेट्स को जगह-जगह निजी स्कूलों में भटकना पड़ रहा है। यदि जोधपुर में एनसीसी अकेडमी खुलती है तो हजारों युवाओं को सेना व अन्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित किया जा सकेगा। वर्तमान में केवल जयपुर में यह सुविधा उपलब्ध है।

हर माह दो-तीन कैंप, निजी स्कूलों के भरोसे नैय्या

जोधपुर एनसीसी गु्रप में 10 (युनिट) जिले शामिल है। औसतन प्रत्येक युनिट में दो से तीन आवासीय कैंप हर महीने आयोजित होते हैं। इसके लिए हर बार नई जगह तलाशनी पड़ती है। एक कैंप में औसतन तीन सौ से ज्यादा कैडेट होते है। इनके रहने और ठहरने की व्यवस्था के साथ-साथ पर्याप्त संख्या में बाथरूम की आवश्यकता रहती है। एनसीसी के पास ट्रेनिंग स्थल नहीं होने से निजी स्कूलों के भरोसे नैय्या पार लगाई जा रही है। हर बार नई स्कूल और जगह तलाशनी पड़ती है। सर्दियों में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

एनसीसी का क्रेज, फिर भी सरकार बेखबर

एनसीसी के प्रति इन सालों में जबरदस्त क्रेज बढ़ा है। खासतौर से सेवा में कॅरियर तलाशने वाले युवा एनसीसी में भर्ती होना चाहते हैं। एनसीसी में न केवल सैन्य ट्रेनिंग दी जाती है, बल्कि सेवाभाव और अच्छे नागरिक बनने के गुर भी सिखाए जाते हैं। वर्तमान में लड़कियां भी बड़ी संख्या में एनसीसी में भर्ती हो रही है। एनसीसी कैडेट आपदा प्रबंधन और अन्य कई मौकों पर महत्ती भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद किसी भी सरकार ने एनसीसी के संसाधन बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया।

ये होंगे फायदे

-युवाओं को बेहतर ढंग से ट्रेंड किया जा सकेगा।

-बेहतर ट्रेनर बुलाए जा सकेंगे।

-एनसीसी के प्रति भरोसा बढ़ेगा।

-मोटिवेशनल और ट्रेनिंग प्रोग्राम बढ़ाए जा सकेंगे।

-कैडेट्स को सुविधा रहेगी।

कई राज्यों ने समझा मोल

देश के कई राज्यों में एनसीसी अकेडमियां संचालित है। इनमें कैडेट्स को बेहतर ढंग से ट्रेंड किया जा रहा है। यहां प्रशिक्षित होने वाले कैडेट बेहतर परफाेर्म करते हैं। आरडीसी परेड और सेना में भी युवाओं का चयन हो रहा है। पंजाब, हरियाणा, गुजरात, बिहार, जम्मू कश्मीर समेत कई राज्यों में ऐसी अकेडमियां संचालित है।



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