जोधपुर. शीतकालीन प्रवास पर आने वाले मेहमान परिन्दों को थार में तापमान कम होने और अनुकूल जलवायु का इंतजार है। हर साल प्रवासी मेहमान पक्षी कुरजां के साथ अक्टूबर माह में पड़ाव डालते है लेकिन इस बार पेलीकॅन, मालार्ड, पिन्टेल, स्पॉट बिल, पर्पल मुरहेन, वेबलर, टेलर, लार्क, इंडियन रोलर, बी - ईटर, व शिकारी पक्षियों सहित करीब 100 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का आगमन उम्मीद के अनुरूप नहीं हुआ है। जलाशयों में तैरने वाले कई प्रजातियों के वाटर बर्डस् ने भी अब तक दस्तक नहीं दी है । पक्षी विशेषज्ञ इसका प्रमुख कारण तापमान अनुकूल नहीं होने और जलाशयों में पानी की सतह को गर्म होना मान रहे है ।
इस बार विलंब से हुई कुरजां दस हजारी
जोधपुर जिले के फलोदी क्षेत्र के खींचन गांव में भी कुरजां की संख्या नवम्बर के प्रथम सप्ताह बीतने के बाद करीब 10 हजार तक पहुंची है। कुरजा पक्षियों की नियमित देखरेख करने वाले सेवाराम माली के अनुसार सितम्बर में दस्तक देने वाली कुरजां की संख्या पिछले वर्ष 14 अक्टूबर को ही दस हजार हो चुकी थी।
तापमान कम होने के साथ बढ़ेगी तादाद
मारवाड़ के अधिकांश तालाबों में लबालब पानी का होना जलीय पक्षियों को उतरने से रोकता है। पानी कम होने पर किनारे निकलने के बाद पक्षियों को ज्यादा भोजन लेने में सुविधा होती है। तालाबों का जलस्तर कम होने पर उगने वाली प्राकृतिक घास रूडी शेल डक को पसंद आती हैं । केटल इग्रेट खेतों में भोजन का लुत्फ उठा रहे हैं । कुरजा के समूह के जोधपुर और मारवाड़ के विभिन्न जलाशयों पर पहुंचने का क्रम जारी है।जोधपुर जिले के जोजरी, खारड़ा, रामासनी, जाजीवाल, सुरपुरा के आसपास के क्षेत्र में कुरजां सहित 25 से 30 प्रजातियों के परिन्दें नजर आने लगे है। इनमे केटल एग्रेट, लिटिल इग्रेट, रूडी शेलडक की तादाद अच्छी है। सर्दी बढ़ने के साथ 15 नवम्बर तक विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी परिन्दों के आने की उम्मीद है।
-शरद पुरोहित, पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ
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