UMID CARD---- 'उम्मीद` पर कायम रेलकर्मियों का इलाज

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जोधपुर।

मण्डल स्तरीय रेलवे अस्पताल में सेवानिवृत व सेवारत रेलकर्मियों के साथ आम मरीजों को चिकित्सकों से परामर्श लेने से दवाई लेने तक लम्बी कतारों से मुक्ति मिलेगी। चिकित्सा सेवाओं को और अधिक व्यवस्थित बनाने और इसमें पारदर्शिता लाने के उद्धेश्य से रेलवे अस्पताल को ऑनलाइन मोड पर लिया गया है। अब अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श से दवाई वितरण तक का कार्य कम्प्यूटर के जरिए होने लगा है।
उल्लेखनीय है कि रेलवे अस्पताल में कई बार मरीजों की संख्या ज्यादा होने से दवा काउंटर पर लम्बी लाइनें लग जाती थी। इससे मरीज विशेषकर सेवानिवृत व महिलाएं ज्यादा परेशान होती थी।

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मरीज के मोबाइल में रहेगा रेकॉर्ड
रेलवे अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श, दवाई, सिक अथवा फिट सर्टिफिकेट, लेबोरेट्री जांच रिपोर्ट आदि का पूरा रेकॉर्ड संबंधित चिकित्सक और स्वयं रोगी के मोबाइल एप एचएमआइएस में सुरक्षित रहेगा, जिसे रोगी खुद जब चाहे देख सकता है। कोई भी मरीज गूगल प्ले स्टोर पर जाकर एचएमआइएस एप डाउनलोड कर चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकता है।
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28 तक चलेंगे उम्मीद कार्ड बनाने के शिविर
रेलवे की नई व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों में उम्मीद (यूनिक मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड )कार्ड बनाने के काम में भी तेजी आई है। वहीं, जिन रेलकर्मियों ने उम्मीद कार्ड नहीं बनाए है, उनके लिए रेल प्रशासन की ओर से विशेष शिविर लगाए जा रहे है। रेलवे अस्पताल, डीआरएम ऑफिस और रेलवे बैंक में शिविरों में पिछले 15 दिनों में करीब 800 रेलकर्मियों ने उम्मीद कार्ड बनाने के लिए अपना पंजीयन कराया है। शिविर 28 अक्टूबर तक चलेगा।
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नई व्यवस्था के तहत रेलवे में चिकित्सा सुविधाओं का लाभ लेने के लिए अब प्रत्येक सेवारत या पेंशनर्स रेलकर्मी को उम्मीद कार्ड रखना होगा।
गीतिका पाण्डेय, मण्डल रेल प्रबंधक
जोधपुर



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