जोधपुर।
अवैध हथियारों (Illegal Weapons) के साथ भारी मात्रा में जिंदा कारतूस (Live Bullets) मिलने को लेकर आशंकित पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया है। अपराधियों व हथियार के अवैध निर्माताओं व तस्करों पर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ हथियार निर्माताओं को भी नियमों के दायरे में लाने की तैयारी शुरू की गई है। पुलिस इस प्रयास में है कि पुलिस की एनओसी या हरी झण्डी मिलने के बाद ही लाइसेंस धारकों को जिंदा कारतूस बेचे जाएं।
जुगाड़ से हथियार और करोड़ों के प्लांट में कारतूस
पुलिस का मानना है कि अवैध रूप से हथियार मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में घर-घर बनाए जाते हैं। इसके लिए लोहे के पुराने पाइप, स्पि्रंग व अन्य जुगाड़ काम लिए जाते हैं। जबकि कारतूस सिर्फ ऑर्डेनेंस फैक्ट्री में ही बन सकते हैं। जिनके प्लांट की लागत ही लाखों-करोड़ों में आती है।
पुलिस के संदेह के दायरे में लाइसेंसधारक या विक्रेता
लाइसेंसधारक गन निर्माता का कहना है कि कारतूस बनाने के लिए उच्च क्वालिटी की मशीनों की जरूरत होती है। अवैध हथियार बनाने वाले कारतूस नहीं बना सकते हैं। ऐसे में पुलिस को अंदेशा है कि हथियार लाइसेंसधारक या हथियार व कारतूस बेचने वाले चोरी-छुपे कारतूसों को बाजार में बेचते हैं।
प्रयास : थाने से एनओसी लें या खाली खोल दिखाएं
पुलिस ने अपराधियों तक जिंदा कारतूस पहुंचने की तह तक जाने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया है। पुलिस ने विक्रेताओं से आग्रह किया है कि लाइसेंसधारकों को कारतूस बेचने से पहले संबंधित थाने से एनओसी लें। साथ ही लाइसेंसधारक से खाली खोल दिखाने का भी आग्रह किया है। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि उसने पहले वाले कारतूस का उपयोग किया है अथवा नहीं।
ऑर्डेनेंस फैक्ट्री में ही कारतूस का निर्माण
प्रमुख गन निर्माता का कहना है कि हथियारों का उपयोग बचाव और अपराध या आक्रमकता के लिए होता है। अपराधियों के पास मैटेलिक कारतूस होते हैं। जो सिर्फ भारी और उच्च क्वालिटी की मशीनों वाली ऑर्डेनेंस फैक्ट्री में ही बन सकते हैं। इनके प्लांट व मशीनों की लागत ही करोड़ों रुपए में आती है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ही हथियार व कारतूस बनाने के लाइसेंस देती है।राजस्थान में पिछले साल 42 लाइसेंस दिए गए थे। जोधपुर में लाइसेंस न मिलने से अधिकांश प्लांट में उत्पादन नहीं हो रहा है।
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'हथियार के लाइसेंसधारक वर्ष में दो सौ कारतूस खरीद सकते हैं। जो स्थानीय हथियार व कारतूस विक्रेताओं से खरीदे जाते हैं। ऐसी कोशिश की जा रही है कि कारतूस बेचने से पहले विक्रेता संबंधित पुलिस स्टेशन से एनओसी प्राप्त करें। साथ ही उनसे पूर्व में खरीदे कारतूस के खाली खोल या ब्यौरा प्राप्त करें।'
रविदत्त गौड़, पुलिस कमिश्नर जोधपुर।
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