IIT: ऑनलाइन कक्षाओं से छात्रों व उनके परिवार की प्राइवेसी भंग

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जोधपुर. कोविड-19 के दौरान पूरी दुनिया ने पहली बार लगातार दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई की। इससे कई नैतिक व सामाजिक पहलु सामने आए, जिस पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप की ओर से अध्ययन किया गया। अध्ययन में सामने आया कि लाइव कैमरा फीड होने से छात्रों व उनके परिवार की गोपनीयता काफी भंग हुई। इससे कई विद्यार्थी भी असहज हुए थे।

शिक्षकों को भी अपनी शिक्षण सामग्री को कई बार अप्रिय तरीके से स्क्रीन पर पेश करना पड़ा, लेकिन इसके कुछ सुखद पहलु भी रहे। एमबीएम के छात्रों को पहली बार औद्योगिकी घरानों और बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनियों के टॉप मैनेजमेंट से ऑनलाइन रु-ब-रु होने का मौका मिला जो ऑफलाइन कक्षा में संभव नहीं था। इसके उलट विज्ञान के छात्रों को लैब में नहीं जाने से भारी नुकसान हुआ। मेडिकल छात्रों को शरीर क्रिया विज्ञान जैसे विषय ऑनलाइन नहीं पढ़ाए जा सकते थे। आइआइटी जोधपुर ने अपने निष्कर्ष में हाइब्रिड क्लास को प्रमोट करने की बात कही है। ऑनलाइन कक्षा के साथ फील्ड विजिट हो। इससे विद्यार्थियों में सेल्फ लर्निंग बढ़ेगी।

ये थे शोध टीम

इस शोध में आइआइटी जोधपुर के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप के सहायक प्रोफेसर डॉ वेंकटेश मूर्ति, डॉ सोनाली भट्टाचार्य और सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी पुणे के डॉ शुभाशीश भट्टाचार्य शामिल थे। इस व्यावहारिक अध्ययन के परिणाम हाल ही में एशियन जर्नल ऑफ बिजनेस एथिक्स में प्रकाशित हुए हैं।

6 करोड़ शिक्षक, 1.37 करोड़ छात्र प्रभावित

आइआइटी ने यूनेस्को की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि शैक्षणिक संस्थान बंद होने से दुनिया भर के 138 देशों में 1.37 अरब छात्र प्रभावित हुए। इसमें 6.20 करोड़ स्कूल शिक्षक और विश्वविद्यालय के व्याख्याता भी शामिल थे।

3 करोड़ भारतीय छात्र हुए परेशान

दो सालों तक ऑनलाइन कक्षाएं ही सीखने को मुख्य आधार थी। भारत में 3 करोड़ से अधिक छात्र छात्राएं खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी, घर पर निजी शिक्षण स्थान की अनुपलब्धता सहित अन्य कारकों से प्रभावित रहे।

परीक्षा में नकल की संभावनाएं बढ़ी

ऑफलाइन कक्षाओं की तुलना में ऑनलाइन कक्षाओं में मूल्यांकन और परीक्षा के दौरान नकल की अधिक घटनाएं और अवसर अधिक बढ़े। इस समस्या को एप्लीकेशन बेस्ड बनाकर दूर किया जा सकता है।



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