जोधपुर. महाराजा अजीतसिंह के कार्यकाल 1707 से 1724 के दौरान मंडोर उद्यान में निर्मित देवताओं की साळ से सटे प्राचीन मंदिर में गणपति की मूर्ति को मारवाड़ की सबसे प्राचीन और विशाल माना जाता है। जोधपुर के मंडोर उद्यान परिसर में गणपति के अनूठे मंदिर में प्रथम पूज्य गणेशजी ने दाएं - बाएं काला और गोरा भैरुजी को जंजीरों से बांधकर रखा है । एक विशाल चट्टान को तराश कर बनाई गई तीनों मूर्तियां 15 फीट की है । भगवान गणेश के चरणों में मूषक भी दर्शाया गया है । गणेशजी के गले में शेषनाग भी है ।मंदिर में तीनों -देवताओं का नियमित पूजन होता है। इनमें एक ही क्रम में दांयी ओर गोरे और बांयी ओर काले भैरुजी तथा मध्य में गणेशजी रिद्धि - सिद्धि विराजित है।
चौथी शताब्दी की मानी जाती है मूर्ति
मांडव्यपुर व मारवाड़ की राजधानी रहे मंडोर में गणेशजी की विशाल मूर्ति को चौथी शताब्दी में निर्मित माना जाता है । जोधपुर ही नहीं मारवाड़ , गोडवाड और देश के कोने - कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अनूठे मंदिर के दर्शनार्थ आते हैं। नवविवाहित जोड़े मंगलमय जीवन का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं । विभिन्न राज्यों में रहने वाले मारवाड़ के प्रवासी विवाह के बाद ढोक और बच्चों के मुंडन संस्कार के लिए मंदिर आते हैं और ढोल थाली बजवाकर आभार जताते हैं ।
मंदिर में दो बार पुष्प उत्सव
काला गोरा भैरु व गणेश मंदिर में वर्ष में दो बार भाद्रप्रद और पौष मास की अमावस्या को भव्य तरीके से पुष्प उत्सव मनाया जाता है । समस्त जोधपुर के पुष्प व्यवसाय से जुड़े लोगों व पुष्प विक्रेताओं की ओर से इस बार भी 27 अगस्त को पुष्प उत्सव में फूल मंडली सजाई जाएगी।
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