जोधपुर. दक्षिणी पूर्वी एशिया में बहुतायात में होने वाले Dragon फल की खेती थार मरुस्थल की जलवायविक परिस्थितियों में करने के लिए केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान CAZRI ने गत वर्ष अपने फील्ड में ड्रेगन के पौधे लगाए, लेकिन इस साल मई में जोधपुर में ही तापमान करीब 47 तक पहुंच गया। अत्यधिक तापमान को Dragon सहन नहीं कर पाया। कई पौधे नष्ट हो गए। कुछ को बचाने का प्रयास किया गया। पाली के आसपास कई किसानों ने भी डे्रगन पर दांव खेला लेकिन उन्हें भी काफी परेशानी आई। तापमान के साथ लू के थपेड़ों ने भी ड्रेगन को डममगा दिया। काजरी अब इस साल नियंत्रित तापमान यानी नेट लगाकर फिर से ड्रेगन को खड़ा करने का प्रयास करेगा। वैसे Dragon शुष्क क्षेत्र का ही पौधा है। इससे 35 से 40 डिग्री के मध्य ही तापमान चाहिए। काजरी अगर Thar की भीषण से इसे बचाने में सफल हो जाती है तो आने वाले समय में ड्रेगन पर ठेलों पर अनार-अमरुद की तरह 50 रुपए किलो मिलने लगेगा।
ड्रेगन फ्रूट की खेती गुजरात व महाराष्ट्र के शुष्क क्षेत्रों में ही होती है इसलिए काजरी ने गत वर्ष अपने यहां इसका प्रयोग शुरू किया। ड्रेगन की दो स्पीशीज लगाई। एक स्पीशीज, जिसमें बाहरी आवरण और पल्प दोनों ही गुलाबी रंग के हैं जो सर्वाधिक महंगा बिकता है। एक अन्य स्पीशीज में बाहरी आवरण गुलाबी और पल्प सफेद रंग का था लेकिन इस बाद मौसम ने काजरी का साथ नहीं दिया। मार्च में ही तापमान 43 डिग्री तक पहुंच गया था। ढाई से तीन महीने तक भीषण गर्मी रही, जिसके चलते ड्रेगन के पौधे जल गए।
आसियान देशों में लहलहाता है ड्रेगन
सामान्य तौर पर ड्रेगन को चीन का फल माना जाता है लेकिन वास्तव में इसकी खेती दक्षिणी पूर्वी एशिया यानी आसियान देशों में बहुतायात से होती है। वियतनाम इसका बड़ा उत्पादक है। थाइलैंड, ब्रुनेई, मलेशिया, फिलिपिंस में भी इसके अच्छे खासे बागान है।
प्रति 100 ग्राम ड्रेगन फ्र्रूटस में पोषक तत्व
- 262 कैलारी ऊर्जा
- 3.57 ग्राम प्रोटीन
- 9.2 मिलीग्राम विटामिन सी
- 107 मिलीग्राम केल्सियम
- 39 मिलीग्राम सोडियम
- 1.8 ग्राम डाएटरी फाइबर
(विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होने के कारण यह शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ाता है जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है। इसमें एंटी एजिंग गुण भी है।)
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