जोधपुर. आने वाले समय में आप देश के ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं भी देख पाएंगे, जो पहले कभी पर्यटकों/नागरिकों के लिए संग्राहलय में उपलब्ध नहीं होती थी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर का टेक्रोलॉजी इनोवेशन सेंटर इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ मिलकर वर्चुअल संग्राहलय की स्थापना कर रहा है। इस संग्राहलय में आइआइटी की ओर से संवर्धित वास्तविकता (AR) और आभासी वास्तविकता (VR) प्लेटफॉर्म विकसित करेगा। गौरतलब है कि आइआइटी जोधपुर एआर-वीआर टेक्रोलाजी पर काम करने वाली देश की प्रमुख आइआइटी में से एक है। भविष्य में एआर-वीआर की जरुरत को देखते हुए इस साल से एमटैक पाठ्यक्रम भी शुरू किया गया है।
पुरातत्व में युवा पीढ़ी को आकर्षित करने के लिए गेम बेस्ड प्लेटफॉर्म होगा। विभिन्न प्रकार की टेक्नोलॉजी के माध्यम से पर्यटक पुरातत्व चीजों को देखने के साथ उनका अनुभव भी कर पाएंगे। गेम बेस्ड प्लेटफॉर्म से ऐतिहासिक उत्खनन स्थलों और स्मारकों के बारे में जानने में मदद मिलेगी। हालांकि अभी तक उन स्मारको के बारे में जानकारी नहीं दी गई है, जिनको डिजिटल संग्राहलय में स्थान दिया जाएगा।
अभी तक गूगल के साथ इमर्सिव वीआर अनुभव
एएसआइ ने आगरा के ताजमहल, दिल्ली में हुमायूं का मकबरा, महाराष्ट्र की अजंता-एलोरा गुफाएं और उत्तर प्रदेश में सारनाथ सहित पांच ऐतिहासिक स्थलों पर एक इमर्सिव वीआर अनुभव प्रदान करने के लिए गूगल के कला और संस्कृति विभाग के साथ एमओयू किया था। जिसके बाद गूगल ने विशेष टेक्नोलॉजी की मदद से इनमें वीआर एक्सपीरियंस दिया है। इसे गूगल कार्ड बोर्ड वीआर हैंडसेट का उपयेाग करके स्मार्टफोन पर भी देखा जा सकता है।
30 अरब डॉलर का बाजार
वर्चुअल टेक्रोलॉजी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एआर, वीआर और एमआर उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार वर्तमान में करीब 30 अरब डॉलर का है। अगले दो साल में इसके दस गुना तक बढऩे की उम्मीद है। भारत का एआर/वीआर बाजार वर्तमान में लगभग 1.8 अरब डॉलर का है।
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