HANDICRAFT: तीन माह में 30 हजार ने खोया रोजगार

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जोधपुर

रूस-यूक्रेन विवाद, विश्वव्यापी मंदी ने देश के उद्योग-धंधों को हिलाकर कर दिया है। इसमें जोधपुर का प्रमुख हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग भी शामिल है। मंदी की यह आंच अब निर्यात के साथ कामगारों की रोजी-रोटी पर दिखने लगी है। हाल यह है कि पिछले तीन महिनों में जोधपुर की आयरन व वुडन हैण्डीक्राफ्ट इंडस्टी से करीब 30 हजार कारीगरों, दस्तकारों व मजदूरों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। उद्योग जगत के पंडितों की माने तो आने वाले दिनों में यह ग्राफ और बढ़ने की संभावना है।

बड़े व पुराने निर्यातकों के पास भी आगे के नए ऑर्डर नहीं है। काम नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में कामगारों की छंटनी हो रही है, जिससे जोधपुर में बेरोजगारी बढ रही है ।

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200 कारखानों में काम ठप

कमजोर निर्यात ऑर्डर के चलते जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट उद्योग पर इस सदी की सबसे बड़ी मार दिख रही है । अमरीका- यूरोप में मंदी के चलते हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों के ऑर्डर्स में भारी कमी देखने को मिली है । काम नहीं होने के कारण जोधपुर में अब तक करीब 200 से अधिक कारखनों में काम ठप हो गया है। इस वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही में हैण्डीक्राफ्ट निर्यात करीब 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है जो कि वर्तमान िस्थत को देखते हुए जुलाई के अंत तक 50 प्रतिशत तक बढ जाएगी ।

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क्रिसमस के ऑर्डर नहीं

इस बार क्रिसमस सीजन के भी ऑर्डर के लिए जोधपुर के निर्यातक तरस रहे है । विदेशों से क्रिसमस के ऑर्डर में भी भारी गिरावट देखी जा रही है । जोधपुर से निर्यात होने वाले उत्पादों में करीब 60 फीसदी तक कार्य क्रिसमस से पहले ही होता है। अमरीका सहित सभी पश्चिमी देशों के शोरूम में अक्टूबर तक माल सजने लगता है।
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अन्य उद्योगों की भी यही िस्थति
जोधपुर में हैण्डीक्राफ्ट के अलावा स्टील री रोलर्स, स्टील बर्तन, टेक्सटाइल आदि इकाइयां है। इन उद्योगों में भी मंदी, कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि आदि के चलते ऑर्डर्स की कमी है तथा यहां भी करीब 40-50 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है।

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निर्यातकों का कहना, 2008 के बाद की सबसे बड़ी मंदी

जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश व कोषाध्यक्ष मनीष झंवर का कहना है कि हैण्डीक्राफ्ट सेक्टर में वर्ष 2008 के बाद की यह सबसे बड़ी मंदी है। कई हैण्डीक्राफ्ट इकाइयों में नए ऑर्डर नहीं होने से काम ठप पड़ा है। निर्यातक अशोक चौहान का कहना है कि ओवर ऑल मंदी है। इसका असर निर्यात व काम करने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है।
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