जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के लापरवाह कार्मिकों ने पखवाड़े में दूसरी बार शव किसी और को दे दिया। अजीब स्थिति तब हुई जब परिजन शव को लेने राइकाबाग उस घर में पहुंचे जहां शव दे दिया था। वे लोग शव को स्नान करवाकर अंतिम संस्कार को लेकर जाने ही वाले थे कि परिजनों ने आपबीती सुनाई। दोनों ही परिवार यह सुनकर हतप्रभ हुए और गुस्सा गए। दोनों परिजनों ने समय रहते अपने-अपने परिवार के सदस्य के शव लिए और व्यवस्थाओं को कोसने लगे।
हुआ यों कि रोहट निवासी रामेश्वर शर्मा पुत्र नारायणलाल शर्मा नाबरिया की कार को मुकनपुरा के निकट एक निजी बस ने टक्कर मार दी थी। गंभीर अवस्था में रोहट से जोधपुर रैफर किया गया था। रामेश्वर का एमडीएम अस्पताल में उपचार चल रहा था। मंगलवार रात को मौत हो गई थी। सूचना पर रोहट पुलिस बुधवार को जोधपुर पहुंची और पोस्टमार्टम करवाया। मोर्चरी के कार्मिकों ने शव परिजनों को सुपुर्द किया, जैसे ही परिजनों ने शव का चेहरा देख तो ठिठक गए। वो शव रामेश्वर का नहीं था।
रामेश्वर का शव ले गए राइका बाग
परिजन ने मोर्चरी में मौजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से सम्पर्क किया। तब पता लगा कि कुछ देर पहले राइकाबाग निवासी मानसिंह पुत्र भंवर सिंह राजपुत का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सुपुर्द किया गया है। रामेश्वर के परिजन ने मानसिंह के घरवालों के नम्बर जुटाए और उनसे सम्पर्क किया। उन्हें शव बदले जाने की जानकारी दी। राइका बाग निवासी मृतक के परिजन ने शव का चेहरा देखा तो वो दूसरे का शव होने की पुष्टि हुई। वे स्नान करवाकर अंतिम संस्कार की तैयारी में ही थे। तब तक उस शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। ऐसे में रामेश्वर के परिजन मानसिंह का शव लेकर राइकाबाग पहुंचे, जहां रामेश्वर का शव प्राप्त कर उनका शव उन्हें सुपुर्द किया। बाद में परिजन शव लेकर रोहट पहुंच गए। फिलहाल इस संबंध में शास्त्रीनगर थाना पुलिस को सूचित नहीं किया गया है। थानाधिकारी जोगेन्द्र सिंह ने ऐसी सूचना होने से इनकार किया है।
18 दिन पहले भी बदला गया था शव
एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी में गत 26 जून को भी शव की अदला-बदली हो गई थी। जालोर के भंवरानी निवासी भैराराम सरगरा का शव किसी अन्य को दे दिया गया था। जबकि भैराराम के परिजन को जवाहर कॉलोनी निवासी राजेश नायक का शव सुपुर्द किया गया था। परिजन की सहमति पर पुलिस ने भैराराम का शव हिन्दू सेवा मण्डल को सौंपकर अंतिम संस्कार करवा दिया था। फिर 27 जून को राजेश का शव भी हिन्दू सेवा मण्डल को सौंपा गया था। भैराराम के परिजन को शव नहीं मिल सका था। उसके भाई भूराराम ने इस बारे में शास्त्रीनगर थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी।
राइका बाग जाकर लाए रामेश्वर का शव
पाली जिले में रोहट निवासी रामेश्वर शर्मा गत 11 जुलाई को सड़क हादसे में घायल हो गए थे। मंगलवार रात एमडीएम अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद शव सुपुर्द किया गया तो पता लगा कि वह किसी अन्य का शव है। यह शव राइका बाग निवासी एक व्यक्ति का था। उनके घरवालों से सम्पर्क किया गया। फिर राइका बाग जाकर रामेश्वर का शव लाया गया।
कन्हैयालाल पारीक, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राजस्थान ब्राह्मण महासभा
इधर, अंतिम संस्कार के लिए रोहट में करते रहे इंतजार
रोहट में रामेश्वर शर्मा के अंतिम संस्कार का समय बुधवार दोपहर का दिया गया था। लेकिन मोर्चरी में शव बदल जाने से रोहट में मृतक के परिजन एवं रिश्तेदार इंतजार करते रहे। जब पता चला कि शव बदल गया है तो रोहट में सब हौच पौच हो गए। फिर करीब तीन बजे परिजन शव लेकर पहुंचे और उसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/cvPuIeX
0 comments:
Post a Comment