Women Smugglers: जोधपुर. मादक पदार्थ व शराब तस्करी पुरुषों के आधिपत्य वाला अवैध कारोबार माना जाता रहा है, लेकिन मारवाड़ में अब मादक पदार्थ की तस्करी में भी सामाजिक बदलाव नजर आने लगा है। इस अवैध कारोबार में अब महिलाएं भी पांव जमाने लग गई हैं। पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर न सिर्फ डोडा पोस्त व अफीम बल्कि घातक स्मैक व एमडी तक की तस्करी में लिप्त होने लगी हैं। पुलिस ने पिछले कुछ समय में जो कार्रवाई की हैं, उनमें कई महिलाएं भी गिरफ्त में आ चुकी हैं। एक महिला के खिलाफ तो हिस्ट्रीशीट तक खोली जा चुकी है।
नाकाबंदी में सॉफ्ट नेचर
अमूमन पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां नाकाबंदी के दौरान वाहनों में महिलाओं व बच्चों को देख नरम व्यवहार अपनाती हैं। उन्हें परेशानी से बचाने के लिए बगैर अधिक जांच पड़ताल के निकाल दिया जाता है। इसी का फायदा उठाकर महिलाएं तस्करी में शामिल हो रही हैं। आसोप में पकड़ में आ चुकी राजल जाट स्वयं खुद लग्जरी कार चलाकर मादक पदार्थ लेकर आती थी। वहीं, गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश करने के दौरान नरम रुख के चलते आसानी से जमानत मिल जाती है।
जल्द रुपए कमाने की लालसा
गिरफ्त में आने वाली महिलाओं से स्पष्ट है कि इनके परिवार के कुछ लोग या करीबी अथवा आस-पास के लोग तस्करी में लिप्त रहे हैं। इन्हीं को देखकर महिलाएं भी तस्करी की तरफ आकर्षित हुईं। जल्द रुपए कमाने का लालच भी इन महिलाओं को अवैध कारोबार में धकेलने की एक वजह रही है।
जोधपुर में पकड़ में आने वाली प्रमुख महिलाएं
लेडी डॉन के नाम से कुख्यात सुमता उर्फ सुनीता बिश्नोई ने लग्जरी कारों में जीपीएस सिस्टम लगाकर तस्करी का नेटवर्क खड़ा किया था। ऐसी ही एक कार के पकड़ में आने के बाद पुलिस उस तक पहुंच गई थी। आसोप थानान्तर्गत तेजपुरा गांव में ग्वाला की ढाणी निवासी राजल जाट ने डोडा पोस्त का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया था। वह खुद लग्जरी कारों में डोडा पोस्त भरकर लाती थी और आस-पास के क्षेत्रों में सप्लाई करती थी। उसे व पति अनोपाराम व शिंभुपुरा के नंदलाल डांगी को 566 किलो डोडा पोस्त व तीन कारों के साथ गिरफ्तार किया गया था। वहीं, कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड सेक्टर 8 स्थित मकान में धड़ल्ले से एमडी ड्रग्स बेचने के आरोप में शारदा पूनिया को गिरफ्तार किया जा चुका है। वह वाॅट्सऐप ग्रुप पर एमडी बेचा करती थी। जिले के फलोदी में भी एक महिला स्मैक बेचने के लिए कुख्यात है। उसे कई बार गिरफ्तार किया जा चुका है।
पारिवारिक माहौल
पारिवारिक माहौल से महिलाएं भी तस्करी में लिप्त होने लगी हैं। पति या परिवार का कोई सदस्य तस्करी में कर रहा है तो उसके आकर्षण में महिलाएं भी शामिल होने लग जाती है। कई कार्रवाई में महिलाएं पकड़ में आ रही हैं, जो खुद के महिला होने का फायदा उठाकर मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त हो जाती हैं।
अनिल कयाल, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जोधपुर
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/4kqFGtM
0 comments:
Post a Comment