जोधपुर।
मुख्यमंत्री के एक ट्वीट ने जोधुपर जिले के 90 हजार ऋणी किसानों सहित राज्य भर के लाखों किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी थी, लेकिन यह खुशी उस समय काफूर हो गई, जब बैंक अधिकारियों ने यह कह दिया कि खरीफ ऋण चुकाने की अवधि में 365 दिन का कायदा ही काम करेगा। ऋण लिए हुए 365 दिन बीत गए हैं तो किसान डिफाल्टर की श्रेणी में आएगा।
ऐसी िस्थति में किसान को वर्ष भर के ब्याज के साथ ऋण चुकाना होगा। 365 दिन से अधिक समय वाले किसानों के लिए 30 जून तक ऋण चुकाने के आदेश का कोई मायना नहीं होगा। अब हालत यह है कि जोधपुर जिले के 50 फीसदी से अधिक खरीफ किसान डिफाल्टर हो गए हैं और उन्हें ब्याज सहित ऋण भुगतान करना होगा। इससे जिले के किसानों को ऋण के अलावा ब्याज के रूप में करोड़ों रुपयों का भार झेलना पड़ेगा, वहीं सरकार व बैंक को करोड़ों रुपयों की अतिरिक्त आय होगी।
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मुख्यमंत्री ने ट्वीट में यह कहा
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 16 मई को ट्वीट कर कहा कि खरीफ फसली ऋण चुकाने की अवधि 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून तक की जाती है। दरअसल बीते चार वर्ष से सरकार 31 मार्च समाप्त होते ही अवधि बढ़ाकर 30 जून करती रही है, लेकिन इस बार डेढ़ महीने बाद यह घोषणा हुई।
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365 दिन का अड़ंगा
देर से अवधि बढ़ाने की घोषणा से किसानों ने राहत की सांस ली और मूल राशि लेकर ग्राम सेवा सहकारी समितियों के पास पहुंचे। समितियों के व्यवस्थापकों ने फिर भी ब्याज मांग लिया। उन्होंने तर्क दिया कि ऋण खाता 365 दिन को पार कर गया है इसलिए ब्याज देना होगा। इस नए अड़ंगे ने फिर से किसानों की नींद उड़ा दी है।
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200 करोड़ ऋण वितरण
इस वर्ष 760 करोड़ रुपए खरीफ ऋण बांटने का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक केवल करीब 200 करोड़ रुपए ऋण ही वितरित हुआ है। किसान नया ऋण तभी ले सकता है, जब पुराने ऋण का चुकारा हो। ब्याज को लेकर किसान अभी भी असमंजस में है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार 365 दिन का अड़ंगा हटाएगी और वे 30 जून तक बिना ब्याज ऋण भर देंगे।
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फैक्ट फाइल
90 हजार ऋणी किसान जोधपुर जिले में
284 सहकारी समितियां जोधपुर जिले में
760 करोड़ रुपया इस साल ऋण वितरण का लक्ष्य
200 करोड़ रुपया अब तक ऋण वितरण
48 हजार अवधिपार किसान
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सरकार ने पहले तो डेढ़ माह तक तिथि नहीं बढ़ाई व 31 मार्च से पहले किसानों को मांग पत्र भी नहीं दिए गए और 365 दिन का अडंगा डाल दिया है। ऐसे में जिले के अधिकांश किसान अवधिपार होने से डिफाल्टर हो गए है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करने की मांग को लेकर आगामी दिनों में आंदोलन की योजना बना रहे है।
मोहनराम सारण, अध्यक्ष
दईकड़ा ग्राम सेवा सहकारी समिति
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एपेक्स बैंक के इस आदेश से आम काश्तकार को नुकसान होगा। बैंक को यह आदेश मार्च में निकालना चाहिए था, ताकि किसान इस वर्ष 1 अप्रेल को 365 दिन पूरे होने पर बिना ब्याज अपना ऋण चुका देते । हाल में निकाले इस आदेश से अधिकांश किसान डिफाल्टर की श्रेणी में आ गए है।
रघुनाथराम चौधरी, पूर्व निदेशक
जोधपुर सेन्ट्रल को ऑपरेटिव बैंक
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