जोधपुर।
प्रदेश में सिंचित क्षेत्र में खरीफ सीजन की कपास की बुवाई 15 अप्रेल से शुरू हो गई थी। प्रदेश में बिजली कटौती के कारण ट्यूबवेल से सिंचाई होने वाली बुवाई प्रभावित हो रही है। सरकार ने बिजली संकट के चलते कृषि क्षेत्र में 6–7 घंटे से कम करके 5 घंटे विद्युत सप्लाई के आदेश जारी किए है। हालांकि सरकार की ओर से घोषित समय से किसानों को विद्युत सप्लाई कम मिल रही है। ऐसे में किसानों को कपास बुवाई को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में जून से पहले सिंचाई का पानी मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे उक्त क्षेत्र में नहरी सिंचाई पर निर्भर किसान बुवाई को लेकर आशंकित है। ऐसे में किसान दोहरे संकट में है। बिजली संकट के बीच जोधपुर, बीकानेर, नागौर जिले में अगले 10 दिन में कपास बुवाई शुरू होगी। प्रदेश में मई माह पूरा होने तक लगभग 8 लाख हैक्टेयर में बुवाई होने का अनुमान है।
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कपास में तेजी से किसानों का बुवाई पर रुझान
गत सीजन में कपास के भावों में तेजी के चलते किसानों का कपास बिजाई को लेकर इस बार रुझान बढ़ा है। गत वर्ष जिले में 70 हजार हैक्टेयर व प्रदेश में 6 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इस बार जिले में 80 हजार हैक्टेयर में व प्रदेश में 8 लाख हैक्टेयर कपास की बुवाई का अनुमान है।
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सरकार से पर्याप्त विद्युत सप्लाई की मांग
भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री तुलछाराम सिंवर व संभाग अध्यक्ष नरेश व्यास ने बताया कि बिजली संकट के कारण किसान कपास बुवाई को लेकर आशंकित है। इंदिरा गांधी नहर मरम्मत के चलते बुवाई समय में पानी मिलने की उम्मीद कम है। वहीं ट्यूबवेल सिंचित क्षेत्र में बिजली सप्लाई संकट बनी हुई है। सरकार कृषि सिंचाई के लिए पर्याप्त विद्युत सप्लाई दे, ताकि किसानों को कपास की फसल का फायदा मिल सके ।
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प्रदेश में कपास बुवाई का अनुमान (हैक्टेयर में)
जिला-- बुवाई अनुमान
हनुमानगढ़ -- 2.40 लाख
श्रीगंगानगर-- 1.85 लाख
जोधपुर-- 0.80 लाख
नागौर-- 0.50 लाख
भीलवाड़ा-- 0.35 लाख
अलवर-- 0.26 लाख
बीकानेर-- 0.28 लाख
झुंझुनूं-- 0.17 लाख
चुरू-- 0.11 लाख
अन्य जिलें-- 1.28 लाख
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कुल 8.00 लाख
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