JNVU paper leak: सरकार ने मांगी रिपोर्ट, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

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जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष और बीए द्वितीय वर्ष के इतिहास विषय के प्रश्र पत्रों के व्हाट्सएप पर वायरल होने और उनके परीक्षा में आए प्रश्न पत्रों से हुबहू मिलान होने से आउट होने की आशंका के बाद राज्य सरकार ने विवि से रिपोर्ट मांगी है। विवि ने अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। विवि ने इसे फिलहाल आउट नहीं मानते हुए आंतरिक जांच करने की बात कही है। उधर विवि की ओर से पुलिस में दी गई रिपोर्ट के दूसरे दिन देर रात इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। दूसरी तरफ शनिवार को लगातार चौथे दिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से विवि के केंद्रीय कार्यालय में उग्र प्रदर्शन किया गया। पुलिस ने छात्र छात्राओं को कुलपति के कक्ष में घुसने से रोका। इस दौरान दोनों के मध्य मामूली धक्का-मुक्की हुई। एबीवीपी का कहना है कि कुलपति ने इस मामले में सात दिन में जांच का आश्वासन दिया है।

विवि में 19 मई से स्नातक की परीक्षाएं शुरू हुई है। 25 और 26 मई को हुई बीए की परीक्षाओं का प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से करीब आधे घण्टे पहले व्हाट्सएप पर आ गया था, जिसको लेकर विद्यार्थियों में नाजरागी है। विद्यार्थियों के लगातार प्रदर्शन के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। साथ ही सरकार ने दोषी कॉलेज अथवा कार्मिकों पर कार्यवाही करने को भी कहा है।

एक घण्टे तक प्रदर्शन
एबीवीपी की ओर से शनिवार सुबह भी विवि के केंद्रीय कार्यालय में बड़ा प्रदर्शन किया गया। पुलिस ने कार्यकत्र्ताओं को कुलपति कक्ष में घुसने से रोका तो छात्र छात्राओं व पुलिस के मध्य नोक झोंक भी हुई। बाद में कुलपति ने स्वयं ही एक प्रतिनिधि मण्डल को बुलाकर उनकी बात सुनी और पेपर आउट के मामले में शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया।

कई कॉलेज के परीक्षा केंद्र उसी कॉलेज
सूत्रों के मुताबिक जोधपुर, जालोर, पाली, बाड़मेर और जैसलमेर के कस्बों में स्थित कई कॉलेजों के परीक्षा केंद्र उसकी कॉलेज में बना दिए गए। इससे पेपर आउट होने की आशंका बढ़ रही है। तत्कालीन कुलपति प्रो आरपी सिंह के समय ऐसे 9 कॉलेजों के सामूहिक नकल का मामला सामने आया था। इन कॉलेजों ने खुद ही सभी परीक्षार्थियों को नकल करवाई थी। परीक्षा में नकल की रोकथाम के लिए जेएनवीयू अपने शिक्षकों का उडऩ दस्तों का गठन करता है लेकिन दूरस्थ गांव व कस्बों में पहुंचने की सूचना पहले से कॉलेजों को मिल जाती है जिससे नकल पर रोकथाम मुश्किल हो जाता है।



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