जोधपुर. चार साल तक सम्बद्ध कॉलेजों का जीएसटी जमा नहीं कराने पर राज्य सरकार ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय पर करीब 9 करोड़ रुपए की पैनल्टी लगाई है। भारी भरकम पैनल्टी देखकर विवि के कर्मचारियों और अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। उधर पेंशनर्स भी टेंशन में आ गए हैं कि इतनी पैनल्टी देने के बाद उनकी पेंशन के लिए पैसे बचेेंगे की नहीं?
देशभर में जीएसटी लागू होने के बाद राज्य सरकार ने विवि से सम्बद्धता प्राप्त कॉलेजों से सम्बद्धता शुल्क के साथ 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी वसूलने के निर्देश दिए थे जो वर्ष 2017 से लागू हो गए। व्यास विवि का वित्त व लेखा विभाग 2017 से लेकर 2021 तक आंख मूंदकर बैठा रहा। न तो सम्बद्ध कॉलेज से जीएसटी ली और न ही सरकार के खाते में जमा हुई। अब जीएसटी विभाग की ओर से जेएनवीयू को नोटिस भेजने पर विवि प्रशासन की आंखें फटी की फटी रह गई। विवि से सम्बद्ध 261 कॉलेजों को करीब 50 करोड़ रुपए का जीएसटी बकाया है। इस पर विभाग ने करीब 9 करोड़ रुपए की पैनल्टी लगाई है। विवि कॉलेजों से जीएसटी तो ले लेगा, लेकिन पैनल्टी खुद को देनी पड़ेगी।
कॉलेजों को डिमाण्ड नोटिस, उनके पास भी पैसे नहीं
विवि ने अब चार साल की जीएसटी एक साथ वसूलने के लिए जोधपुर, जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर और पाली के सम्बद्धता प्राप्त कॉलेजों को डिमाण्ड नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। इनसे एक साथ चार साल की जीएसटी चुकाने के लिए कहा गया है। कॉलेज प्रशासन भी एक मुश्त लाखों रुपए वसूली के नोटिस देखकर भौंचक्के रह गए हैं। विवि प्रत्येक विवि से सालाना सम्बद्धता शुल्क, सेक्शनवाइज शुल्क, छात्रों की संख्या के अनुसार शुल्क वसूलता है जो एक लाख से लेकर 10 लाख रुपए सालाना है।
दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही से हिचक
चार साल तक कॉलेजों से जीएसटी नहीं लेने और करीब 9 करोड़ रुपए पैनल्टी के लिए विवि के वित्त, लेखा, सम्बद्धता प्राप्त कॉलेजों की देखरेख करने वाले विवि से जुड़े अधिकारी दोषी है। इन पर कार्यवाही करने से विवि हिचक रहा है।
बिना सोचे-समझे करोड़ों के एरियर बांटे, अब पैसे कहां?
विवि ने सातवें वेतन आयोग और हाल ही में कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत पदोन्नत हुए शिक्षकों को हाथों-हाथ करोड़ों रुपए के एरियर बांट दिए, जबकि दूसरी तरफ कोरोना काल के दो साल में विवि के करीब 1500 पेंशनर्स को पेंशन नहीं मिलने पर आधा दर्जन से अधिक बार धरने, विरोध-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ा है।
हम कॉलेजों से जीएसटी वसूलेंगे। पैनल्टी की राशि एक-एक करोड़ करके जमा कराएंगे। इसके लिए जीएसटी विभाग से बातचीत की गई है।
-प्रो केएल श्रीवास्तव, कुलपति, जेएनवीयू जोधपुर
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