Earth: आप इस समय धूमकेतू के मलबे से गुजर रहे हैं, उल्काओं की हो सकती है बौछार

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जोधपुर. बीते दो-तीन से पूरे विश्व के वैज्ञानिकों की निगाहें रात को आसमां पर टकटकी लगाए हुए है। आसमां में कभी उल्काओं की बौछार नजर आ सकती है। जैसा दिवाली केसमय आसमां में नजारा होता है ठीक कुछ वैसा इस समय घटित हो सकता है। सोमवार की रात इसका पीक है। इसके अगले दो दिन तीन यह घटना देखने को मिल सकती है। यह अद्भुत खगोलीय घटना सालों में एकाध बार होती है। इससे पहले 1985 में ऐसा देखने को मिला था।

दरअसल सूर्य की कक्षा में चक्कर काट रहे ताऊ हरक्यूलिड धूमकेतू में वर्ष 2006 में विस्फोट हो गया था और यह 70 से अधिक टुकड़ों में टूट गया। इसका कुछ मलबा सूर्य के चारों ओर चक्कर लगा रहा है। पृथ्वी अब इस मलबे की कक्षा से गुजर रही है। ऐसे में रात के समय इसके कुछ टुकड़ें यानी उल्काएं पृथ्वी के वातावरण में चमकदार रोशनी के साथ प्रवेश करने की संभावना है। इसकी गति 10 मील प्रति सैकेण्ड होगी। हालांकि बहुत कम संभावना है कि ये टुकड़े पृथ्वी के धरातल तक पहुंचे। धूमकेतू का वैज्ञानिक नाम एसडब्यू-3 अथवा 73पी स्वाजमान-वाचमान है।

अभी तक कुछ नहीं दिखा

अमरीका, यूरोप, एशिया सभी देशों के वैज्ञानिक रात को दूरबीनों से यह नजारा देखने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली। हो सकता है कि हरक्यूलिड के टुकड़ें अनंत में चले गए हो और उसकी कक्षा में कुछ भी नहीं हो।

इस साल यह भी होगी घटनाएं

- सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले विशाल पिण्ड धूमकेतू होते हैं। अरबों धूल कण, चट्टानों के छोटे टुकड़े, बर्फ इत्यादि इनके साथ चिपके होने से हजारों किलोमीटर लंबी पूंछ बन जाती है। पृथ्वी के इसके पास से गुजरने पर इसकी पूंछ का कुछ हिस्सा पृथ्वी के वातावरण में उल्काओं के रूप में दिखाई देता है।

- अब अगली बारिश अगस्त के मध्य में होने वाला है। इस समय पर्सिड धूमकेतू के कक्ष के पास से पृथ्वी गुजरेगी।

- ड्रेकोनिड उल्का बौछार दो अक्टूबर के पास होगी। महीने के अंत में ओरियनिड उल्का बौछार की भी संभावना है।

- नवंबर में लियोनिद उल्का बौछार और साल के समाप्त होने पर जेमिनिड और उर्सिडो धूमकेतू से उल्का बौछार की उम्मीद है।

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ताऊ हरक्यूलिड जैसे धूमकेतू से उल्का बौछार होने का नजारा बहुत कम नजर आता है। इसका पीक 30-31 मई है। इससे दो-तीन दिन पहले और दो-तीन दिन बाद में भी आसमां में रोशनी का नजारा देखने को मिल सकता है। यह केवल रात को साफ वातावरण में देखने को मिलेगा।

प्रतीक त्रिवेदी, खगोलविद्



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