एमबीए का टॉपर खेती में कर रहा कमाल

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

एमबीए का टॉप स्टूडेंट्स लाखों के पैकेज ठुकराकर खेती से जुड़ा
जोधपुर। एमबीए के बाद लाखों का जॉब ऑफर ठुकराकर खेतों से जुड़ना। सुनने में अजीब लग रहा है लेकिन ऐसा कर दिखाया है जोधपुर के ललित देवड़ा ने। अब सफलता की सीढि़यां इस तरह चढ़ रहे हैं कि पीछे देखने की जरुरत भी नहीं है। पश्चिमी राजस्थान की पहली हाइटेक नर्सरी का संचालन कर रहे हैं और अगला कदम एग्रो टूरिज्म की तरफ बढ़ा रहे हैं।
इसलिए खेती में मन रमा
जोधपुर से करीब 12 किलोमीटर दूर सुरपुरा बांध के पास रहने वाले 33 वर्षीय युवा देवड़ा के इस सफर की शुरुआत वर्ष 2011-12 से हुई, जब वे महाराष्ट्र के पुणे से एमबीए कर रहे थे। वहां टॉप-10 स्टूडेंट में शामिल रहे। अंतिम वर्ष में इंटर्नशिप के लिए रोजाना बाइक से वाघोली कस्बे में जाते थे। रास्ते में इनकी नजर बड़े-बड़े ग्रीन हाउस और पॉलीहाउस की तरफ पड़ी, धीरे धीरे इनसे जुड़ाव होता गया। इन्टर्नशिप पूरी हुई तो बतौर आईसीआईसीआई सिक्यूरिटी रिलेशनशिप मैनेजर आठ लाख के पैकेज में जॉब ऑफर हुई, लेकिन ठुकरा दिया। मन खेतों की तरफ ही हो गया।
ऐसे हुई सफर की शुरुआत
ललित ने अपनी पुश्तैनी जमीन से ही शुरुआत करने का फैसला किया। पिता ब्रहमसिंह से पारिवारिक 12 बीघा में से केवल 400 वर्ग मीटर जमीन मांगी। जयपुर में कृषि अनुसंधान केन्द्र में उद्यान विभाग के अधिकारियों से करीब एक माह तक कृषि और उद्यानिकी की बारीकियां सीखी। सबसे पहले अपने फॉर्म पर शेडनेट हाउस लगाकर सब्जियां उगाना शुरू किया। धीरे धीरे पॉलीहाउस भी लगाया। उद्यान विभाग से अनुदान लेकर खीरे का उत्पादन लेना शुरू किया। खीरे के लिए टर्की से बीज मंगवाए। वर्ष 2015-16 में आधा बीघा जमीन पर कुल 28 टन खीरा ककड़ी का उत्पादन हुआ। चार लाख रुपए की लागत आई और पहली बार 12 से 13 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ। खेती में सब्जियों के उत्पादन पर जोर रखा। अपने खेत पर ग्रीन हाउस बनवाया। बूंद-बूंद सिंचाई सिस्टम लगवाया। ककड़ी के बाद लाल, पीली व हरी शिमला मिर्च, टमाटर आदि उगाने शुरू किए। ललित अब पपीता, अनार और स्ट्राबेरी की खेती भी कर रहे हैं। पूरे फॉर्म पर बूंद-बूंद सिंचाई संयत्र लगाया। इनका फॉर्म समन्वित कृषि प्रबंधन का उदाहरण है। केंचुआ यूनिट भी लगाई गई है। कृषि अभियांत्रिकीय के लिए भी यूनिट हैं, जहां छोटे-बड़े उपकरण भी बनाए जाते हैं। खेती में बढ़ते रसायनों के उपयोग को कम करने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाने लगा है।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/JEwNXUs
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment