सिकन्दर पारीक
जोधपुर। हरा सोना उगल रही मरुधरा की धरा पर फूड प्रोसेसिंग इकाइयां अब अन्नदाताओं की तरक्की का रास्ता खोल रही है। फसलों का उचित दाम नहीं मिलने और फसल खराबे के संकट को कम करने के साथ ही कई काश्तकार फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) के जरिए उपज को नए कलेवर के साथ बाजार तक पहुंचा रहे हैं। हालांकि अभी तक ऐसे काश्तकारों की संख्या कम है। बिलाड़ा में सौंफ जींस विशेष मंडी घोषित होने और फूड प्रोसेसिंग में अनुदान से कृषि विभाग को उम्मीद है कि अब और रुझान बढ़ेगा।
यह है स्थिति
राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 के प्रथम चरण में राज्य में 50 किसानों को लाभान्वित किया गया है। कुल परियोजना लागत 6848.33 लाख में से राज्य सरकार ने 3079.50 का अनुदान स्वीकृत किया है। इसमें अधिकांश मसाला, दूध, मूंगफली, प्याज लहसून प्रसंस्करण इकाइयों के साथ ही वेयर हाउस हैं।
रेडी टू ईट पैक्ड फूड की मांग
विशेषकर शहरों में ज्यादातर लोग रेडी टू ईट पैक्ड फूड को विकल्प के रूप में चुनते हैं। कस्बों में भी यह प्रचलन आम होता जा रहा है। इसी बदलाव का नतीजा है कि फूड प्रोसेसिंग में अपार संभावनाएं दिख रही हैं। प्रोसेसिंग के जरिए न केवल खेतीबाड़ी को इंडस्ट्री के साथ जोड़ा जा रहा है। इसके निर्यात के द्वार खोलने पर आमदनी और रोजगार में भी बढ़ोतरी की संभावनाएं हैं।
इनका कहना है
प्रोसेसिंग इकाइयों को लेकर काश्तकारों का रुझान दिख रहा है। मसाला से लेकर लहसून व प्याज की प्रोसेसिंग इकाइयां शुरू हो गई है। बिलाड़ा में सौंफ जींस विशेष मंडी घोषित होने का फायदा मिलेगा।
जब्बर सिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि विपणन बोर्ड, जोधपुर
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