Waste water Use - जोधपुर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से जोधपुर के औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए सोमवार को बैठक आयोजित की गई। बैठक में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक राधेश्याम सोनी ने टेक्सटाइल उद्योगाें से निकलने वाले अपशिष्ट जल को पुनः उपयोग में लाने योग्य बनाने वाली भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की निर्मित तकनीक की जानकारी दी।
सोनी ने बताया कि यह जल प्रदूषण से आयनिक रंगों को हटाने के लिए रेडिएशन ग्राफ्टेड सेलूलोज़ आधारित तकनीक है। यह तकनीक कार्ट्रिज का उपयोग कर कपास वस्त्र उद्योगों से रंगों और रसायनों के सोखने पर आधारित है। इसमें सेलूलोज़ आधारित कार्ट्रिज फि़ल्टर का उपयोग करके, जिन्हें आइरानिक्ली लगाया जाता है और इन कार्ट्रिज को बीएआरसी में विकिरण इकाई से गुजरकर आयनात्मक रूप से सक्रिय किया जाता है। इन कार्ट्रिज में किसी प्रकार का कोई रेडिएशन नहीं होता है उन्हें सूती वस्त्र उद्योगों में उपयोग किए जाने वाले रंगों और रसायनों के शोषण के लिए रासायनिक रूप से सक्रिय किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इसमें उपयोग होने वाला कार्ट्रिज गामा रेडिएशन को निष्क्रिय कर देते है, जिससे इसके अन्दर जितने भी आयरन है, वह इसमें रह जाते है और साफ पानी हमे मिलता है। यह साफ पानी खेतों में और पुनः काम में लेने योग्य होगा।
जेआईए अध्यक्ष एनके जैन ने बताया कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की निर्मित इस तकनीक का एक संयंत्र जोधपुर में और दूसरा पाली में स्थापित करना प्रस्तावित है। बैठक में अनेक उद्यमी मौजूद थे।
जोधपुर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से जोधपुर के औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए सोमवार को बैठक आयोजित की गई। बैठक में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक राधेश्याम सोनी ने टेक्सटाइल उद्योगाें से निकलने वाले अपशिष्ट जल को पुनः उपयोग में लाने योग्य बनाने वाली भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की निर्मित तकनीक की जानकारी दी।
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