जोधपुर. जोधपुर में ऑनलाइन दवाओं की खरीद का कारोबार भी बूम पर है। हर रोज सस्ती दवाओं व बड़े डिस्काउंट के चक्कर में लोग फंस ऑनलाइन दवा मंगवा रहे हैं। इस तरह की ऑनलाइन दवाएं कितनी सही है, इस बारे में संशय ही बना रहता है। ये कारोबार बगैर किसी नियम के धड़ल्ले से चल रहा है। इसमें भी शैड्यूल एच व शैड्यूल एच-1 की दवाएं बगैर परामर्श पर्ची के बेची व खरीदी जा रही हैं। इन पर भी औषधि नियंत्रण विभाग अब तक नकेल नहीं कस पाया है। इन दवाओं के नुकसान को लेकर किसी की जवाबदेही तय नहीं होती। करीब एक दर्जन से ज्यादा कंपनियां देश में ऑनलाइन दवा बेच रही है।
दवाओं का मानक जांचने वाला कोई नहीं
ग्राहकों के लिए अच्छी बात यह है कि उन्हें सस्ती दवाएं मिलती हैं, लेकिन उन दवाओं का स्टैंडर्ड क्या होता है, क्या वे नकली होती हैं, उनकी गुणवत्ता की जवाबदेही किसी की नहीं होती। कई लोग अमानक दवाओं का भी सेवन कर लेते हैं। जानकारी अनुसार नींद की दवाई एक वेबसाइट के अलावा अन्य वेबसाइट से भी अनगिनत संख्या में मंगाई जा सकती है. ऐसे ही अन्य दवाइयों को ऑनलाइन मंगाकर दुरुपयोग किया जा सकता है। जहां रिटेलर मेडिसिन पर 18-20 प्रतिशत तक छूट देते हैं, वहीं ऑनलाइन कंपनियां 40-60 फीसदी तक छूट देती हैं
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इनका कहना हैं....
हमारा वितरण चैनल विश्वसनीय है। ये दवाएं कंपनी से सीधा आती हैं। अब नकली है या असली, ये नहीं पता होता। कोई जांच नहीं होती। मरीज या ग्राहक को ये तक पता नहीं होता कि कहां से दवाइयां आती हैं? औषधि नियंत्रण विभाग के पास कई कार्य हैं, स्टाफ भी कम है। ऑनलाइन कंपनियां प्रलोभन देकर मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं।
- सुनील टी दास, अध्यक्ष, जोधपुर केमिस्ट एसोसिएशन।
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