जोधपुर। राजस्थान High court की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है, जिसमें अधिशेष नर्सिंगकर्मियों के अन्यत्र स्थानांतरण आदेश को खारिज कर दिया गया था।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव तथा न्यायाधीश मदन गोपाल व्यास की खंडपीठ में राज्य सरकार ने एकल पीठ के 9 मार्च के आदेश को चुनौती दी है। अतिरिक्त महाधिवक्ता करणसिंह राजपुरोहित तथा अधिवक्ता रजत अरोड़ा ने कोर्ट में कहा कि नर्सिंग कर्मियों के स्थानांतरण जनहित में किए गए थे। अधिशेष नर्सिंगकर्मियों को खाली स्थानों पर स्थानांतरित किया गया था, ताकि जन स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सके। कोर्ट ने अपीलों को 16 मई को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए एकल पीठ के आदेश पर तब तक रोक लगा दी। दरअसल, अंजू बाला सहित करीब एक सौ याचिकाकर्ताओं ने एकल पीठ में स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि पहले उन्हें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय में रिपोर्ट करने के लिए निर्देशित किया गया और बाद में पहले से कार्यरत स्थानों से इतर जगहों पर पदस्थापित किया गया। याचिकाकर्ता, विशेष पीएचसी ,सीएचसी या उप-केंद्रों में तैनात थे, जिन्हें चिकित्सा सचिव ने 18 फरवरी को सुशासन तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरित कर दिया। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि उन नर्सिंगकर्मियों को हटाया गया है, जो स्वीकृत पदों से अधिक पदों पर कार्यरत थे या जिनका वेतन कार्य करने के स्थान के अलावा अन्य स्थान से लिया जा रहा था। जबकि याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके स्थानांतरण में राजस्थान पंचायती राज (स्थानांतरण गतिविधियां) नियम-2011 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। एकल पीठ ने नियमों का पालन नहीं करने को आधार मानते हुए स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिए थे। अब खंडपीठ ने उस पर रोक लगा दी है।
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