जोधपुर.
सुबह 10.20 बजे थे। जोधपुर हाइवे पर भांडियावास गांव के पास ट्रेलर व स्लीपर बस की भिड़ंत होते ही दोनों वाहनों में आग लग गई। वह नजदीक ही था तो एम्बुलेंस लेकर तुरंत दुर्घटनास्थल पहुंच गया। दोनों वाहनों के आगे वाले हिस्से आग का गोला बन चुके थे। बस में अनेक सवारियां फंसी थी। इनमें महिलाएं और बच्चे भी थे। मदद के लिए आस-पास के कुछ लोग आए।
आगे वाले हिस्से में आग विकराल रूप ले चुकी थी। ऐसे में सभी बस के पिछले हिस्से की तरफ भागे। इन सभी को बाहर निकालने के लिए बसों के कांच फोड़े गए। सबसे पहले महिलाओं को बाहर निकालने की कोशिश शुरू र्की। कई महिलाएं बाहर आ गईं, लेकिन कुछ महिलाओं के बच्चे आग में फंसे थे। ऐसे में कलेजे के टुकड़ों को बचाने के प्रयास में कई महिलाएं आग से झुलस गईं। एक महिला अपनी चार माह की बच्ची को बचा नहीं पाई। जो बस में जिंदा जल गईं और कंकाल में तब्दील हो गई।
आग बुझने के बाद का मंजर तो दिल दहलाने वाला था। ट्रेलर चालक और बस के दस यात्री जिंदा जल चुके थे। ग्यारह जनों के शव कंकाल में तब्दील हो गए थे। इनकी पहचान तक संभव नहीं थी। जैसे-तैसे कंकाल को कपड़ों में लपेटा गया। यह क्षण रोंगटे खड़े कर देने वाला था। जो जिंदगी में पहली बार आंखों के सामने था। सभी कंकाल जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी लाए गए।
(जैसा कि एम्बुलेंस चालक राजेन्द्र चौधरी ने राजस्थान पत्रिका को बताया।)
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