जोधपुर. दिवाली की खुशियों में गत दो दिनों में कई घरों में बच्चे व लोग जल गए। इस दौरान किसी की आंख चोटिल हुई तो किसी के अन्य हिस्से जल गए। रिश्तेदार आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे और डॉक्टर्स को दिखा राहत की सांस ली। इस दौरान पटाखे से जले कई लोगों ने अपने घरों में ही पुरानी पद्धति से इलाज लिया और ठीक हो गए। ऐसों की संख्या भी अनगिनत रहीं।
महात्मा गांधी अस्पताल में सर्जरी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. अजय मालवीय ने बताया कि उनकी यूनिट दिवाली के दिन पूरी तरह से मुस्तैद रही। कुल 25 मरीज इमरजेंसी में पहुंचे। इसमें से 21 का उपचार किया गया। इसमें से 4 मरीजों को भर्ती करने की आवश्यकता रहीं, 3 को भर्ती किया गया और 1 मरीज ने भर्ती होने से इनकार कर दिया। पटाखे से जलने के कारण एक 6 वर्षीय बालक भर्ती है और दो महिलाएं दीया जलाते वक्त जल गई। तीनों का उपचार जारी है। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद चौहान ने बताया कि एमडीएम अस्पताल में 25 मामले पटाखे से आंख चोटिल के आए। सभी मामले हल्की चोट के आए। कोई ज्यादा गंभीर मामले नहीं आए। सभी का त्वरित उपचार कर दर्द से राहत दिलाई।
नए दिन पी शराब, पहुंचे अस्पताल
एमडीएम अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में दिवाली-रामा-श्यामा के दिन 127 दुर्घटना में घायल रोगी अस्पताल पहुंचे। ट्रोमा सेंटर इंचार्ज डॉ. विकास राजपुरोहित ने बताया कि 26 मरीजों के दुर्घटना में घायल होने का कारण एल्कॉल था। इन मरीजों ने शराब के नशे में वाहन चलाया। इनमें से ज्यादातर के हैंड इंजरी हुई है, लेकिन एक भी रोगी गंभीर नहीं है।
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