सुरेश व्यास/जोधपुर। प्रदेश के दूसरे बड़े शहर जोधपुर को पांच प्रमुख हाईवे से जोड़ने वाली लगभग 1800 करोड़ रुपए लागत की रिंग रोड परियोजना अब भी प्रक्रिया और जमीन अधिग्रहण की भूलभुलैया में गुम है। तीन साल पहले शुरू हुआ पहले चरण का काम अब तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक महज 32 प्रतिशत काम पूरा हो सका है। गुजरात की जिस सड़क निर्माता कंपनी को काम दिया गया, वह काम शुरू होने के बाद ही अनुबंध की प्रक्रिया में ऐसी हांफी कि अब केंद्र सरकार से अनुबंध की शर्तों में बदलाव करवाने तक की नौबत आ गई है।
दूसरे चरण के लिए अभी टेंडर प्रक्रिया ही चल रही है तो भूमि अधिग्रहण के मामले में भी कई पेच हैं। हालांकि राज्य सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के हस्तक्षेप के बाद भू-अधिग्रहण अधिकारी की नियुक्ति कर दी है, लेकिन केंद्र से अभी मुआवजे के 250 करोड़ रुपए आने बाकी हैं। दूसरे चरण में नागौर रोड से डांगियावास तक 26 किमी सड़क का एनएचएआई ने गत सितम्बर में ही 514.27 करोड़ का टेंडर निकाला है। इसके तहत करवड़ से डांगियावास सेक्शन को चार लेन में बदला जाना है।
हाईब्रिड से हाफी ठेका फर्म
पहले चरण का शिलान्यास जनवरी 2019 में हुआ था। ठेका फर्म को 1161 करोड़ रुपए की लागत का डांगियावास से पाली रोड होते हुए कैरू से नागौर रोड तक 75 किलोमीटर लम्बी सड़क का काम 22 महीनों में पूरा करना था, लेकिन पहले तो काम कभी सरकारी प्रक्रियाओं में अटका रहा तो कभी अतिक्रमणों के कारण काम गति नहीं पकड़ सका। इस दौरान वियतनाम व सिंगापुर जैसे एशियाई देशों की तर्ज पर अपनाई गई ठेके की हाईब्रिड एन्यूनिटी प्रक्रिया के कारण ठेका फर्म कुछ दिन बाद ही हाफ गई। इस प्रक्रिया में ठेकेदार को सरकार कोई भुगतान नहीं करती और उसे पूरी लागत सड़क बनने के बाद टॉल टैक्स से ही वसूल करनी होती है। ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए तो अनुबंध की प्रक्रिया को ईपीसी में बदलने की नौबत आ गई। ऐसे में अब तक 21.99 किमी इलाके में ही काम हो सका है। अब पहला चरण अगले साल दिसम्बर में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जुड़ेगे पांच हाईवे
कुल 105 किमी लम्बी रिंग रोड शहर से बाहर निकलने वाले पांच बड़े हाईवे को कनेक्ट करेगी। इनमें पाली रोड, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर व जयपुर रोड शामिल है। अभी इन हाइवे के लिए वाहनों को शहर के अंदर से गुजरना पड़ता है। रिंग रोड में 9 फ्लाइओवर बनाए जाने हैं।
फैक्ट फाइल
74.619 किमी सड़क बननी है पहले चरण में
1161 करोड़ खर्च होंगे पहले चरण में
32 प्रतिशत काम ही हो सका है अब तक
30.098 किमी सड़क बननी है दूसरे चरण में
673.69 करोड़ आएगी इस चरण की लागत
194.9376 हैक्टेयर जमीन का अधिग्रहण
कंपनी की स्थिति खराब हुई
जिस कंपनी को ठेका दिया था, उसकी स्थिति खराब होने से काम पूरी गति नहीं पकड़ पाया। अभी पुरानी पद्धति पर ही ठेका कंपनी को काम करना है। नई प्रक्रिया अपनाने के बारे में मुख्यालय से अनुमति नहीं मिली है।
- अजय बिश्नोई, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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