जोधपुर. जिम में पसीना बहाना या दौड़ लगाने के साथ अब फिटनेस का नया रूप भी देखने को मिला है। योग व प्रकृति की गोद भी अब बुजुर्गों के साथ युवाओं को काफी आकर्षित कर रही है। प्रकृति की गोद से हमारा मतलब यहां प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से है। इस प्राचीन पद्धति का हाल ही में चलन काफी बढ़ गया है। इस बार केन्द्र सरकार भी चौथा नेचुरोथैपी डे मनाने जा रही है। यह दिन पहली बार 18 नवम्बर 2018 में आयुष मंत्रालय की घोषणा के बाद मनाया गया था।
कोविड के बाद बढ़ा विश्वास कोरोना के दौरान और इसके बाद भी लोगों का योग व नेचुरोपैथी के प्रति विश्वास काफी बढ़ा है। प्रोन स्थिति जिससे कि फेफड़े की क्षमता बढ़ जाती है यह नेचुरोपैथी से ली विधा कोरोना में लोगों के लिए काफी कारगर साबित हुई। इसके अलावा पोस्ट कोविड इफेक्ट में भी लोग प्राकृतिक चिकित्सा से काफी लाभप्रद हुए है।
युवाओं में बढ़ रहा क्रेज
शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त उपनिदेशक चेतन प्रकाश सेन जो कि कोटा ओपन यूनिवर्सिटी के योग काउंसलर भी हैं बताते हैं कि योग व प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति लोगों का रुझान काफी बढ़ रहा है। सर्टिफिकेट कोर्स करने व प्रेक्टिकल जानकरी लेने भी कई युवा आ रहे हैं। इससे उनको रिलीफ भी मिल रहा है। सैन 2004 से योग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और पिछले चार साल से नेचुरोपैथी की बारीकियां भी सिखा रहे हैं। वे आचार्य श्रीराम शर्मा स्वास्थ्य शोध संस्थान के निदेशक भी हैं।
नेचुरोपैथी ऐसे आ सकती है जीवनशैली में
- अपनी जीवन शैली में जल चिकित्सा को अपना सकते हैं। इसमें भाप स्नान, मेहन स्नान, कटि स्नान आदि शामिल हैं।
- शरीर को डिटॉक्सीफाइड करने के लिए जल नेति, सूत्र नेति भी की जा सकती है।
- इसके अलावा मिटटी पटटी व मिटटी स्नान भी महत्वपूर्ण है।
- गर्म पैर का स्नान भी किया जा सकता है।
पौष्टिक खान पान
फास्ट फूड या जंक फूड की बजाय पौष्टिक खान पान में अंकुरित अनाज को शामिल किया जा सकता है। इन दिनों स्प्राउट्स का क्रेज वैसे भी युवाओं में काफी बढ़ गया है। अंकुरित चने, दाना मैथी, तिल और मूंगफली का सेवन सर्वोत्तम माना गया है।
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