जोधपुर. राज्य सरकार के आदेश के बाद आखिरकार सोमवार को सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत बच्चे बुला लिए गए। लापरवाही ये सामने आई कि कई छोटे-बड़े बच्चों के चेहरे पर मास्क तक नहीं देखे गए। स्कूलों की ऑटो व बसों में भी कई बच्चे बगैर मास्क व बिना सोशल डिस्टेंस के बैठे नजर आए। शहर के नामचीन स्कूलों की क्लासों में तो अनुशासन देखने को मिला, लेकिन सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाएं इतनी माकूल नहीं देखी गई। हालांकि कुछ सरकारी स्कूल में बिना मास्क आए बच्चों को छुट्टी के वक्त मास्क पकड़वाए गए। जोधपुर में पहले दिन ज्यादातर स्कूलों में 50 से 60 प्रतिशत तक ही बच्चों की उपस्थिति देखी गई।
ब्याह-शादियों के सीजन के चलते भी कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को फिलहाल स्कूल नहीं भेजा है। कई स्कूलों में बच्चों के डेंगू होने के कारण प्रार्थना पत्र भेजे गए हैं, इनमें हवाला दिया कि उनका बच्चा डेंगू ग्रसित है, उपचार लेकर स्वस्थ होने के बाद ही स्कूल लौटेगा। कोरोना को लेकर भी कई अभिभावक चिंतित हैं, जिन्होंने सोमवार को भी अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।
बगैर मास्क भी आए बच्चे
शहर के कई कई स्कूलों में बच्चे मास्क व बगैर मास्क आए। जूनी मंडी ब्वॉयज स्कूल में व्याख्याता रीना छंगाणी ने बगैर मास्क आए बच्चों को छुट्टी के बाद मास्क दिए और नियमित स्कूल मास्क लगाकर आने की सलाह दीं। वहीं जूनी मंडी गल्र्स स्कूल की कई छात्राएं छुट्टी के बाद बगैर मास्क दिखी। साथ ही मंडोर के दइजर व भटियानाड़ी स्कूल के भी कई विद्यार्थी छुट्टी के बाद बगैर मास्क दिखे।
अभिभावक-स्कूल का दायित्व, मास्क लगवाएं
पत्रिका व्यू
बच्चे मास्क लगाकर न आएं तो इनके जिम्मेदार शिक्षक-अभिभावक ही होंगे। बच्चों को हेल्थ के प्रति जागरूक करना होगा। क्योंकि ये देश के भविष्य हैं। अभी कोरोना पूर्ण रूप से खत्म नहीं हुआ है। कोरोना की संभावित तीसरी वेव नवंबर में आ सकती है, इसलिए सभी को शिक्षा के मंदिरों में सजग रहने की जरूरत है। बच्चों को हेल्थ के प्रति जागरूक करने में शिक्षक-प्रधानाचार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। साथ ही अभिभावक भी ध्यान दें कि उनका बच्चा स्कूल जाते और आते वक्त मास्क लगाकर रखें।
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