जोधपुर. अवैध नशीले पदार्थ और नशीली दवाइयों का कारोबार जोधपुर में करोड़ों पार है। मथुरादास माथुर अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में नशे से बीमार पड़े और नशा छोडऩे के इच्छुक मरीजों की हिस्ट्री खंगाले तो सर्वाधिक युवा और श्रमिक सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं, पूछताछ में सामने आता हैं कि युवा अवसाद, शौक मौज व खुद को हाइ-फाइ बताने के लिहाज से नशा कर रहे हैं। नशे की स्मैल परिजनों से छिपाने के लिए नशीली दवाइयों तक का सेवन कर रहे हैं। वहीं कई श्रमिकों को उनके ठेकेदारों और मालिकों की ओर से नशा उपलब्ध कराया जाता है, ताकि उनकी कार्यक्षमता में बढ़ोतरी हो, वे अत्यधिक काम कर मुनाफा दे सके।
गुजरात से आ रही नशीली दवाएं
जोधपुर के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों और संभागीय जिलों में नशीली दवाएं गुजरात से आ रही है। ड्रग विभाग की कई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हो चुका है। इसमें खांसी के काम आने वाली दवाएं, कोडिन, ट्रमाडॉल व नींद की गोलियां सहित कई प्रोडक्ट युवा नशे में काम ले रहे हैं। शहर के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार नशीली दवाइयों की खेप मिली है। इतना ही नहीं, शहर में भी कई बार क्रय-विक्रय के बिल बिना नशीली दवाएं पकड़ी जा चुकी है। अनेक कार्रवाइयों के बावजूद नशीली दवा विक्रेताओं के आज भी हौंसले बुलंद हैं।
नशा आंतरिक क्षमता कमजोर कर रहा
नशा शरीर में आंतरिक क्षमता कमजोर कर रहा है। शरीर के अन्य अंग तक प्रभावित होते हैं। इससे व्यक्ति का डिप्रेशन और बढ़ता है। इस दौरान नशा या नशीली दवा प्राप्त करने के लिए व्यक्ति चोरी तक करने लग जाता है। वह हर संभव प्रयास करता हैं कि पैसा कहां से मिले। अपराध की तरफ बढऩे में गुरेज तक नहीं करता। इसके अलावा नशीली दवा लेने वाले हर रोज दुकान बदलते है, क्योंकि एक दुकानदार इन्हें बार-बार नशे की दवा देता ही नहीं है। ये नशा करने वाले शुरुआत में शौकिया, दोस्तों की फरमाइश पर शुरू करते हैं। धीरे-धीरे ये लोग नशे पर निर्भर हो जाते हैं। कई बार मजदूरों के ठेकेदार भी श्रमिक की वर्र्किंग बढ़ाने के लिए नशा शुरू करवा देते हैं।
- डॉ. जीडी कूलवाल, वरिष्ठ आचार्य, मनोचिकित्सा विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
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