जोधपुर। कोरोना महामारी के चलते हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों के वर्ष 2022 की शुरुआत में जर्मनी में होने वाले एक्सपोर्ट फेयर्स में भाग लेने पर फिलहाल संशय है। जोधपुर के करीब 50 से ज्यादा निर्यातकों ने जर्मनी में होने वाले अन्तरराष्ट्रीय कोलोंग फेयर, फ्रेंकफर्ट फेयर, हैमटेक्स फेयर आदि के लिए स्टॉल्स बुक करवा रखे हैं। इसके लिए निर्यातकों ने करोड़ों रुपयों के नए सेम्पल्स भी बनवा लिए। अब जर्मनी सहित यूरोप में कोरोना के बढ़ते मामलों ने निर्यातकों को असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है।
मिली 15 तक शुल्क जमा कराने की मोहलत
यूरोप के कई देशों ने लॉकडाउन लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन जर्मनी फेयर में हिस्सा लेने को लेकर उत्साहित निर्यातकों को वहां की फेयर कमेटी ने इसका शुल्क जमा कराने के लिए अब पंद्रह दिसंबर तक की मोहलत दी है।
फैक्ट फाइल
- 100 करोड़ का नुकसान होगा फेयर नहीं होने से
- 50 से अधिक निर्यातकों ने स्टॉल बुक करा रखी है
- 1500 करोड़ का सालाना निर्यात होता है केवल यूरोपीय देशों में
- 12 हजार कंटेनर सालाना यूरोपीय देशों को होते है निर्यात
- 800 से अधिक है जोधपुर में निर्यातक
- 3500 करोड़ का सालाना निर्यात होता है विभिन्न देशों में
- 2 लाख आर्टिजन, श्रमिकों को रोजगार दे रहा है हैण्डीक्राफ्ट उद्योग
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फेयर होगा या नहीं, यह अभी कह नहीं सकते हैं। यूरोप में कोविड के बढ़ते मामलों व यहां से सेम्पल भेजने की बढ़ती लागत को देखते हुए फेयर में नहीं जाने का निर्णय लिया है।
मोहित मोहनोत, निर्यातक
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वर्तमान हालात को देखते हुए यूरोप में ट्रेवल नहीं करने की एडवाइजरी जारी की गई है। कई निर्यातकों ने जर्मनी में होने वाले फेयर में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है ।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
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