पहले कोरोना, अब महंगाई ने मारा, टमाटर हुआ 'लालÓ

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जोधपुर।
आम आदमी पर पहले कोरोना और अब महंगाई की मार पड़ रही है। डीजल-पेट्रोल के दाम में लगी आग अब आदमी की रसोई तक पहुंच गई है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे से ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। वहीं बेमौसम बारिश की मार भी महंगाई के रूप में पड़ रही है। इससे टमाटर 'लालÓ हो गया है, वहीं अन्य सब्जियों के भाव भी आसमान पर पहुंच गए है। मंडियों में लोकल सब्जियों की आवक घटने व बाहर से आ रही सब्जियों का ट्रांसपोर्ट खर्च बढऩे से सब्जियों के दाम दो से तीन गुना तक बढ गए है।
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बेमौसम बारिश से आवक कम
टमाटर उत्पादक प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश में बारिश से टमाटर की फसल खराब हो गई है। इससे टमाटर की आवक कम हो गई। जोधपुर के आसपास के क्षेत्रों से भी पर्याप्त सप्लाई नहीं है। सप्लाई कम व मांग ज्यादा होने से भी टमाटर महंगा हो गया है। जोधपुर में अभी नासिक से टमाटर आ रहा है।
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उपभोक्ताओं पर दोहरी मार
सब्जियों की कीमत में आई महंगाई से उपभोक्ता पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां पेट्रोल-डीजल से परिवहन और अन्य उत्पाद महंगे हो गए है, वहीं अब सब्जी की कीमतों में इजाफे से बचत पर सीधा असर पड़ा है। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि अन्य राज्यों से आने वाली फल-सब्जियों की कीमतों में तेजी परिवहन शुल्क बढऩे से है।
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सब्जियों की कीमत (होलसेल/रिटेल भाव प्रति किलो में)
सब्जी-- होलसेल -- रिटेल
टमाटर- 50-60 --- 70-80
प्याज- 20-25 --- 35-40
मिर्च- 25-40 --- 50-60
शिमला मिर्च- 55-60 --- 75-80
ग्वार फली- 50-60 --- 70-75
टिण्डी- 20-25 --- 30-40
भिंडी 40-50 --- 60-70
पत्ता गोभी- 25-40 ---45-55
फूल गोभी- 45-50 ---60-65
नीम्बू- 35-40 --- 50-60
धनिया--- 35-40 ---- 50-90
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बाहरी राज्यों से टमाटर कम आ रहा है। किराया-भाड़ा ज्यादा, मांग ज्यादा है, इसलिए टमाटर सहित अन्य सब्जियां महंगी हुई है।
नरेन्द्रसिंह परिहार, अध्यक्ष
फल सब्जी मंडी व्यापारी एवं विक्रता यूनियन सीटू
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हम भी होलसेल में सब्जी अभी महंगी ला रहे है, इसलिए आगे सब्जी ज्यादा दामों में बेचनी पड़ रही है।
सुनिल गहलोत, सब्जी विक्रेता
सिवांची गेट
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कोरोना काल से ही सब्जियां महंगी आ रही है, ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार को महंगाई रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
रेशमबाला
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सब्जियां महंगी होने से घर का बजट बिगड़ रहा है। रसोई गैस, किराना के साथ अब महंगी सब्जियों के दामों से घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।
बिन्दु टाक
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