जोधपुर. एम्स जोधपुर के शिशु रोग विभाग में रविवार को सिमुलेशन आधारित कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें पीजी रेजिडेंट व आइसीयू फ़े लोज को अल्ट्रा साउंड निर्देशित सेंट्रल लाइन लगाने का सही तरीक़ा सिमुलैशन लैब में सिखाया गया। गंभीर मरीज़ों में दवाई देने के लिए आपातकाल एवं आइसीयू में गर्दन या जांघ में बड़ी नस में सुई लगाने की ज़रूरत होती है। जिसके माध्यम से ज़रूरी दवाएं शीघ्रता से दी जा सके। शुरू में यह बड़ी सुई अंदाज़ से लगाई जाती थी जिसमें कई बार जानलेवा परिणाम होते थे, जैसे गर्दन में खून जमा होना, छाती में हवा का दबाव से सांस रूक जाना होता था। इमरजेंसी और आइसीयू में अल्ट्रा साउंड मशीन के बढ़ते चलन से ये सेंट्रल लाइन अल्ट्रा साउंड मशीन से निर्देशित की जाती है, जिस से ये गंभीर परिणाम होने का रिस्क काफी कम हो जाता है। अल्ट्रा साउंड के माध्यम से भी यह प्रक्रिया जटिल होती है। यह प्रयोगशाला विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कुलदीप सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्यक्रम का आयोजन डॉ भरत चौधरी ने किया। डॉ डेजी खेरा एवं डॉ एलिजा मित्तल ने भी सहयोग किया।
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