जोधपुर. विश्वभर में बढ़ रहे कुपोषण की समस्या को देखते हुए भारतीय कृषि पर खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न उत्पादन करने की अत्यधिक मांग है। इसको लेकर केन्द्र केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने राजस्थान के शुष्क क्षेत्र के किसानों की आजीविका बढ़ाने, गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न पैदा करने व उनको सुरक्षा देने के लिए प्रदेश के केर, मोरिंगा (सहजन) व नागौरी मैथी के कटाई यंत्र, मूल्य संवर्धन, कटाई के बाद विकास के लिए कृषि विश्वविद्यालय का 2.35 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकार किया है।
नागौरी मैथी, केर और मोरिंगा की बहुतायत खेती को देखते हुए परियोजना का कार्यक्षेत्र जोधपुर, जालोर तथा नागौर होगा। परियोजना की अवधि 3 वर्ष की होगी। इस परियोजना का संचालन कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ पीयूष प्रधान व डॉ सरेश एन वी करेंगे।
पोषक तत्वों का खजाना है केर, मोरिंगा, मैथी
केर: पश्चिमी राजस्थान के मरूस्थलीय क्षेत्र की प्रमुख उपज है केर। यह औषधी निर्माण, अचार, सब्जी, पशु चारा व ईधन के रूप मे प्रमुखत: उपयोग में लिया जाता है। समय पर केर की तुड़ाई नहीं करने पर इनकी गुणवत्ता में कमी आती है। प्रोजेक्ट के तहत ऐसे यंत्रों का निर्माण किया जाएगा, जिससे किसानों को केर के फ ल कम समय मे तोडऩे में आसानी होगी।
मोरिंगा: - मोरिंगा का पौधा पोषण, औषधीय लाभों और औद्योगिक उपयोगों के लिए प्रसिद्ध है। मोरिंगा की पत्तियां नवजात शिशु की मां को अधिक मात्रा में पौष्टिक दूध देने में सक्षम होती है। किसान वैश्विक स्तर पर मोरिंगा के सूखे पत्तों का पाउडर तैयार कर सुपरफू ड के रूप में विपणन कर रहे हंै। इसमें कई प्रकार के विटामिन, खनिज, प्रोटीन, अमीनो एसिड, क्लोरोफि ल का एक सुलभ स्त्रोत है, साथ ही यह कुपोषण दूर करने में भी सहायक होता है।
मैथी:- नागौरी या पान मैथी एक मसाला व नकदी फ सल है। इसे पान मैथी तथा कसूरी मैथी के रूप में भी जाना जाता है। औषधीय व पौष्टिकता से भरपूण यह दुनियाभर में व्यापक रूप से प्रयोग में ली जाती है। यह भारत में केवल नागौर व जोधपुर क्षेत्र में उगाई जाती है। पौषण की दृष्टि से कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फ ास्फ ोरस और जिंक का उत्कृष्ट स्त्रोत है।
उन्नत कृषि यंत्रों का निर्माण होगा
नागौरी मैथी, केर व मोरिंगा के पत्तों की कटाई के लिए उन्नत कृषि कटाई यंत्र बनाने के लिए आधुनिक वर्कशॉप स्थापित किए जाएंगे, जिससे भविष्य में कृषि की आवश्यकता को देखते हुए उन्नत कृषि यंत्रों का निर्माण किया जा सकेगा।
साथ ही, चयनित ग्रामीण क्षेत्र में केर, मोरिंगा व पान मैथी के संग्रह और प्रसंस्करण से जुड़े किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा व इन फ सलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
परियोजना का अधिकाधिक लाभ इस क्षेत्र के किसानों को मिलेगा, उनकी आय बढ़ेगी व जीवन स्तर सुधरेगा। साथ ही, इन पारंपरिक फसलों का संरक्षण-संवर्धन होगा।
प्रो बीआर चौधरी, कुलपति
कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर
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