जोधपुर। पुलिस-बदमाश मुठभेड़ में एक बदमाश की मौत के बाद वाल्मीकि समाज ने विरोध प्रदर्शन किया और और आक्रोश दिखाते हुए गुरुवार को गली-सडक़ों पर सफाई नहीं की। नगर निगम के गैराज से सफाई कार्य में लगे सरकारी वाहन भी नहीं निकले। ऐसे में पूरे शहर में अव्यवस्थाएं हो गई। निगम अधिकारी भी इस पूरे प्रकरण में कुछ जवाब नहीं दे पाए। गुरुवार दोपहर बाद पुलिस व प्रशासन के समक्ष समाज की ओर से बनी सहमति से अब शुक्रवार से फिर से सफाई व्यवस्था पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
ऐसे पड़ा प्रभाव
- करीब ४ हजार सफाई कर्मचारियों ने पूरी तरह से कार्य का बहिष्कार किया। गलियों व सडक़ों पर जो सफाई होती है या जिन क्षेत्रों से निगम के कर्मचारी ही कचरा संग्रहण करते वहां काम पूरी तरह से प्रभावित रहा।
- ७ कंपनियां हैं जो कि पूरे शहर में वाहनों के जरिये डोर टू डोर कचरा संग्रहण करती है, उसमें से १ कंपनी ने काम नहीं किया, अन्य ६ कंपनियों के ठेके के कर्मचारी काम पर आए।
- नगर निगम गेराज से कोई सरकारी वाहन नहीं निकाला गया। ऐसे में जिन डोर टू डोर वाहन से कचरा एकत्रित हुए वह ठेकेदार की बड़ी गाडि़यों से केरू डम्पिंग यार्ड पहुंचाया गया।
सडक़ों पर चलना हुआ मुश्किल
शहर की कई सडक़ों पर कचरे के ढेर लग गए। अमूमन यह कचरा सुबह ८-९ बजे तक हट जाता है। जिससे जब व्यापार खुलता है तो सडक़ें साफ होती है। लेकिन कार्य बहिष्कार के कारण यह कचरा सडक़ों के बीच व किनारे पूरे दिन पड़ा रहा। इससे वाहन चालकों व राहगीरों को काफी परेशानी हुई। साथ ही सडांध मारने से स्थानीय लोगों व व्यापारियों का जीवन भी दुश्वार हो गया।
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