जोधपुर. राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में शहर की प्रतिष्ठित रंग संस्था आकांक्षा संस्थान की ओर से मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि पर उन्हीं की कहानियों पर निर्मित नाटकों का मंचन शुक्रवार को जय नारायण व्यास स्मृति भवन टाउन हॉल में शुरू किया गया। प्रथम दिन शुक्रवार शाम मंचित नाटक 'सद्गति Ó में कर्मकांड, जाति और धर्म सम्मत उत्पीडऩ को लेकर कटाक्ष किया गया। मुंशी प्रेमचंद की श्रेष्ठ रचनाओं में से एक 'सद्गतिÓ नाटक भारत की तत्कालीन वर्णाश्रमधर्मी सामाजिक व्यवस्था का एक कटु लेकिन सटीक चित्र प्रस्तुत किया। वर्ष 1930 में लिखी कहानी पर मंचित नाटक के केंद्र में सामाजिक विषमताओं और जात पात का प्रतिनिधित्व करती लकड़ी की एक मोटी गांठ है जिसे पिछड़ी जाति का एक दुखिया अपने दुर्बल हाथों से चीरने का असफ ल प्रयास कर रहा है। दुखिया अपनी बेटी की सगाई के लिए साइत निकलवाने पहुंचता है लेकिन पंडित घासीराम के घर पर दिन भर बेगार करने में विवश हो जाता है। अछूत होने के कारण पानी तक नहीं मांग पाता । अंत में वही लकड़ी की मोटी गांठ उस बेचारे जान ले लेती है । पंडित पंडिताइन इस बात से विचलित नहीं हैं कि उनके अमानवीय व्यवहार ने एक गरीब की जान ले डाली है, अपितु वे इस बात से परेशान हैं कि अछूत की लाश को ब्राह्मण कैसे छुएगा। नाटक के माध्यम से संदेश देने का प्रयास किया गया कि स्वतंत्रता मिलने के 75 वर्ष बाद भी मंचित नाटक 'सद्गति Ó में वर्णित कर्मकांड, जाति और धर्म सम्मत दलित उत्पीडऩ आज भी जारी है। नाटक सद्गति में मंच पर दुखिया की भूमिका में अफजल हुसैन, पंडित की भूमिका में रमेश बोहरा, माधुरी कौशिक-पंडिताइन, नेहा मेहता-झुरिया, राजकुमार चौहान-चिखुरी के पात्र में दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाट्य मंचन में भरत मेवाड़ा, शरद शर्मा, डॉ. नीतू परिहार, अश्विन रामदेव ने अपने पात्र से पूरी तरह न्याय किया। परिकल्पना एवं निर्देशन समारोह आयोजक डॉ. विकास कपूर ने किया।
आज दो लघु नाटकों का होगा मंचन
मुंशी प्रेमचंद की कहानियों पर आधारित नाटकों के मंचन की कड़ी में 9 अक्टूबर को 2 लघु नाटकों क्रमश: 'सौतÓ एवं 'कफ नÓ का मंचन किया जाएगा । इसी क्रम में 10 अक्टूबर को 'बूढ़ी काकीÓ का मंचन होगा। टाउन हॉल में शाम 7 बजे से मंचित सभी नाटकों में प्रवेश निशुल्क रहेगा
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