जोधपुर.
पुलिस से मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर की मौत के मामले में सीआइडी सीबी जांच कर रही है। वहीं, एफएसएल की विशेष टीम भी फायरिंग के हर पहलू से जांच में जुटी है। गत दिनों सीन रिक्रिएशन के दौरान एफएसएल ने हिस्ट्रीशीटर व पुलिस की निजी कार की बॉडी में लगी गोलियों की जांच के लिए तिनकों की मदद ली। जिससे यह जानने का प्रयास किया गया कि दोनों तरफ से जो फायरिंग की गई थी किस दिशा व ऊंचाई से आई थी और कारों की बॉडी से निकलकर किस तरफ गई थी।
पुलिस की पिस्तौल में थे १५ राउण्ड, सात बचे
गत १३ अक्टूबर को हिस्ट्रीशीटर लवली कण्डारा को पकडऩे के लिए निकलने से पहले तत्कालीन थानाधिकारी लीलाराम ने एडीसीपी (पूर्व) भागचंद मीणा के गनमैन की पिस्तौल साथ ली थी। इसकी मैग्जीन में १५ राउण्ड गोलियां थी। पुलिस को देख भागने के दौरान हिस्ट्रीशीटर ने फायरिंग की थी। जवाब में निरीक्षक लीलाराम ने आठ राउण्ड फायर किए थे। एक राउण्ड हिस्ट्रशीटर की कार की छत पर, छह राउण्ड चालक के दूसरी तरफ दरवाजे से आर-पार निकले थे। मौके से भाग रहे चालक को पकडऩे के लिए अंतिम गोली हवा में की गई थी।
फायरिंग की दूरी तक जांची
मुठभेड़ की जांच कर रही जयपुर की सीआइडी सीबी ने गत शनिवार को सील रिक्रिएशन कराकर एफएसएल से साक्ष्य एकत्रित कराए थे। एफएसएल के बेलिस्टिक विशेषज्ञों ने कारों पर लगे फायरिंग के निशानों की जांच की थी। हिस्ट्रीशीटर व पुलिस की क्रॉस फायरिंग में दूरी, एंगल व कोण की जांच की गई।
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