जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल के कार्डियोलोजी विभाग में सोमवार को एक तीन वर्षीय बच्चे के दिल में जन्मजात छेद का सफ लतापूर्वक डिवाइस क्लोजर किया गया। बच्चे को जन्म से यह तकलीफ थी जिसके कारण उनका वजन नहीं बढ़ रहा था। कार्डियोलोजी विभाग में डॉ संजीव संाघवी, डॉ रोहित माथुर, डॉ. पवन सारड़ा तथा डॉ अनिल बारूपाल के नेतृत्व में अब तक हृदय के जन्मजात विकारों (दिल में छेद, जन्मजात वाल्व की सिकुडन तथा जन्मजात मेजर आर्टरी में रूकावट-कोआर्कटेशन) का यह 200 वां केस था, जिसका बिना चीर-फाड के डिवाइस क्लोजर किया गया। इस तरह के सारे आपरेशन में एक टीम वर्क की जरूरत रहती है। जिसमें निश्चेता विभाग की अहम भूमिका रहती है। इसी प्रकार न सिर्फ अॅापरेशन के दौरान बल्कि बाद में भी पोस्ट अॅापरेटिव केयर का बड़ा योगदान रहता है। इस टीम में कैथ लेब, सीसीयू, पोस्ट कैथ वार्ड व विभाग के अन्य नर्सिंगकर्मी तथा कैथ लैब टेक्निशियन का भी अहम योगदान रहता है। विभाग में अब तक करीब 21600 एंजियोग्राफ ी तथा 7800 एंजियोप्लास्टी हो चुकी है।
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