जोधपुर. केंद्रीय विश्वविद्यालय अजमेर के पर्यावरण विभाग के अध्ययन में पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान को अलग करने वाले थार की प्राकृतिक दीवार अरावली पर्वतमाला के क्षरण से आने वाले समय में धूल भरे तूफान और आंधियों के दिल्ली तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। शोध के मुताबिक अरावली की ऊंचाई कम होने के साथ हरियाली कम होने और खनन के कारण थार के रेगिस्तान ने पूर्वी हिस्से में घुसपैठ प्रारंभ कर दी है। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एरिडलैंड मैनेजमेंट में प्रकाशित हुआ है।
पर्यावरण विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एलके शर्मा ने अपने स्कोलर आलोक राज के साथ मिलकर तीन स्तर पर यह शोध किया गया। थार मरुस्थल के 1971 से सेटेलाइट डाटा का अध्ययन किया गया। अमरीकी सेटेलाइट लैंण्डसेट से भी डाटा लिया गया। सोशियो-इकोनॉमिक अध्ययन के लिए वर्ष 2011 की जनगणना और थार में वनस्पति का डाटा तीनों के तुलनात्मक अध्ययन के बाद जलवायु में परिवर्तन और तेज आंधियों की तीव्रता बढऩे की आशंका व्यक्त की गई है।
थार मरुस्थल का आधा भाग बहुत अधिक सेंसेटिव
भारतीय थार मरुस्थल का 70 प्रतिशत भाग चार जिलों जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और जोधपुर में है। क्रीटिकल संवेदनशील (सेंसेटिव) क्षेत्र केवल जैसलमेर जिले में है। सबसे कम सेंसेटिव जोधपुर में है। तकरीबन आधा भाग हाईली सेंसेटिव श्रेणी में आता है।
श्रेणी ----------------जिला --------------- क्षेत्रफल ------ प्रतिशत
क्रिटिकल सेंसेटिव ---- जैसलमेर -------------- 24782 ---- 21.22
हाईली सेंसेटिव -----जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर----- 55767 ----47.75
मोडरेट सेंसेटिव ---- बीकानेर व जैसलमेर -------- 30181 ----17.28
सेंसेटिव ---------- जोधपुर ------------------ 17261 ---- 14.78
(क्षेत्रफल वर्ग किलोमीटर में है।)
अफ्रीका में बना रहे कृत्रिम ग्रीन दीवार, हमारे यहां प्राकृतिक दीवार खत्म हो रही
संयुक्त राष्ट्र के अधीन एजेंसी यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन फॉर कॉम्बेक्ट डेजरटीफिकेशन इस दशक को पारिस्थितिकी पुनस्र्थापना दशक के तौर पर मना रही है। इसी के अंतर्गत अफ्रीका में आंधियां रोकने के लिए कृत्रिम ग्रीन दीवार बनाई जा रही है, जबकि भारत में पहले से ही प्राकृतिक ग्रीन दीवार के तौर पर विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली पर्वत विद्यमान है जो गुजरात के पालनपुर (खेड़ब्रह्म) से लेकर दिल्ली के राष्ट्रपति भवन तक टुकड़ों में फैली हुई है। इसकी ऊंचाई अब धीरे-धीरे कम हो रही है जिससे बवण्डर के इसको पार करके पूर्वी राजस्थान से होते हुए देश के अन्य राज्यों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
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‘हमारी प्राकृतिक ग्रीन दीवार के क्षरण होने और मानवीय गतिविधियां बढऩे से आने वाले समय में आंधियों के दिल्ली तक पहुंचने की आशंका है। सेटेलाइट डाटा अध्ययन में यह स्पष्ट हो रहा है।’
-डॉ एलके शर्मा, पर्यावरण विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय (बांदरसिंदरी) अजमेर
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